ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी में सत्ता संग्राम, करदाताओं पर पड़ेगा आर्थिक बोझ

ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी में सत्ता संग्राम, करदाताओं पर पड़ेगा आर्थिक बोझ

ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख विपक्षी पार्टी लिबरल पार्टी इस समय गंभीर आंतरिक राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी की मौजूदा नेता Sussan Ley के नेतृत्व को चुनौती दिए जाने की अटकलों ने न केवल पार्टी में अस्थिरता बढ़ा दी है, बल्कि इसके चलते सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व वरिष्ठ मंत्री Angus Taylor नेतृत्व परिवर्तन (लीडरशिप स्पिल) की तैयारी में हैं। यदि यह चुनौती औपचारिक रूप लेती है, तो संघीय संसद के दर्जनों सांसदों और सीनेटरों को कैनबरा में रुकना पड़ेगा, जिसका खर्च अंततः ऑस्ट्रेलियाई करदाताओं को उठाना होगा।

हजारों डॉलर के सरकारी खर्च की आशंका

नेतृत्व स्पिल की स्थिति में 51 सांसद और सीनेटर, उनके स्टाफ सहित, सरकारी यात्रा और भत्ता नियमों के अंतर्गत भुगतान के पात्र होंगे। रेम्यूनरेशन ट्रिब्यूनल द्वारा वर्ष 2026 के लिए तय दरों के अनुसार, प्रत्येक सांसद को रात्री प्रवास हेतु 322 डॉलर का यात्रा भत्ता मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, जिन मंत्रियों का आवास सरकार द्वारा वहन किया जाता है, वे 223 डॉलर प्रतिदिन तक भोजन एवं अन्य आकस्मिक खर्चों का दावा कर सकते हैं। इस प्रकार एक सांसद या सीनेटर पर औसतन 500 डॉलर प्रतिदिन तक का खर्च सरकार को उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्पिल प्रक्रिया लंबी चली, तो कुल खर्च हजारों डॉलर तक पहुँच सकता है।

274 दिन बाद नेतृत्व पर फिर सवाल

सुश्री सुसन ले ने महज 274 दिन पहले लिबरल पार्टी की कमान संभाली थी और वे पार्टी के इतिहास में इस पद तक पहुँचने वाली पहली महिला नेता हैं। पिछली नेतृत्व वोटिंग में उन्होंने एंगस टेलर को 29 के मुकाबले 25 मतों से बेहद करीबी अंतर से हराया था।

हालांकि, हाल के महीनों में पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता गया है। कुछ वरिष्ठ सांसदों ने रणनीतिक दिशा, जनसमर्थन और विपक्ष की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।

पार्टी के भीतर गुटबाज़ी तेज

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि एंगस टेलर औपचारिक चुनौती देते हैं, तो उन्हें पहले यह साबित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त सांसदों का समर्थन है। इसके लिए हस्ताक्षरयुक्त समर्थन पत्र (पिटीशन) पेश करना आवश्यक होगा।

वहीं, पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि सुश्री ले किसी भी दबाव में पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं और वे खुली चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव लिबरल पार्टी के भीतर गहरी गुटबाज़ी को उजागर करता है।

उपनेतृत्व को लेकर भी बहस

यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो उपनेता के चयन को लेकर भी विवाद की संभावना है। चूंकि सुश्री ले पार्टी की पहली महिला नेता हैं, ऐसे में उनके हटने की स्थिति में यह मांग उठ रही है कि कम से कम उपनेतृत्व का पद किसी महिला सांसद को दिया जाए।

राजनीतिक अस्थिरता का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम न केवल लिबरल पार्टी की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि आम जनता के बीच राजनीति पर भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है—खासतौर पर तब, जब पार्टी के आंतरिक सत्ता संघर्ष का खर्च सीधे करदाताओं को उठाना पड़े।

फिलहाल, देश की राजनीतिक निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एंगस टेलर औपचारिक रूप से चुनौती पेश करते हैं या पार्टी नेतृत्व किसी समझौते के रास्ते आगे बढ़ता है।