भाषा विवाद: उत्तर भारतीयों को लेकर तमिलनाडु के कृषि मंत्री का बयान, राजनीतिक हलचल तेज

भाषा विवाद: उत्तर भारतीयों को लेकर तमिलनाडु के कृषि मंत्री का बयान, राजनीतिक हलचल तेज

चेन्नई।
तमिलनाडु में भाषा नीति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। राज्य के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के एक बयान ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भाषाई विवाद को नया मोड़ दे दिया है। चुनावी माहौल के बीच आए इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है, वहीं सत्तारूढ़ डीएमके को सफाई देनी पड़ी है।

एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री पन्नीरसेल्वम ने राज्य की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) का समर्थन करते हुए कहा कि इसी नीति के कारण तमिलनाडु के युवा विदेशों में बेहतर रोजगार हासिल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई युवा अमेरिका और लंदन जैसे देशों में काम कर रहे हैं और ऊंची आय अर्जित कर रहे हैं।

हालांकि, इसी दौरान उन्होंने उत्तर भारत से आने वाले लोगों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि वे केवल हिंदी जानते हैं, इसलिए तमिलनाडु में उनके लिए रोजगार के अवसर सीमित रह जाते हैं। मंत्री के मुताबिक, ऐसे लोग आमतौर पर निर्माण मजदूरी या पानीपुरी बेचने जैसे काम करते हैं। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नाराजगी देखी जा रही है।

बयान पर बढ़ते विवाद के बीच ड्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की ओर से सफाई दी गई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि मंत्री के बयान का उद्देश्य किसी भी क्षेत्र या समुदाय का अपमान करना नहीं था। डीएमके ने स्पष्ट किया कि पार्टी सभी राज्यों के लोगों का सम्मान करती है और रोजगार को लेकर किसी भी तरह के भेदभाव के पक्ष में नहीं है।

विपक्षी दलों ने इस बयान को उत्तर भारतीयों के खिलाफ अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं।

फिलहाल, भाषा और रोजगार को लेकर यह विवाद राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी होने की संभावना जताई जा रही है।