सिडनी, 25 जुलाई 2025 —
सिडनी का एक बेहद छोटा और शांत उपनगर, ला पेरूज़, आजकल पर्यटकों और मछली पकड़ने के शौकीनों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। पर इसका कारण जितना आकर्षक है, उतना ही विवादास्पद भी — क्योंकि ये सारी हलचल एक विफल सरकारी परियोजना के कारण शुरू हुई है।
78 मिलियन डॉलर की फेरी योजना – और एक भी फेरी नहीं!
न्यू साउथ वेल्स सरकार ने ला पेरूज़ और कर्नेल के बीच चलने वाली फेरी सेवा के लिए दो नए व्हार्फ (घाट) तैयार किए। इस परियोजना पर अनुमानित 18 मिलियन डॉलर का खर्च बताया गया था, जो बढ़कर 78 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 20 महीने की मेहनत के बाद मार्च में दोनों घाट तो बनकर तैयार हो गए, लेकिन अब तक एक भी फेरी ऑपरेटर नहीं मिल पाया है।
व्हार्फ बना फिशिंग हॉटस्पॉट
जब फेरी नहीं चली, तो सरकार ने घाट को मछली पकड़ने के लिए खोल दिया। इसके बाद से यह स्थान पश्चिमी सिडनी से आने वाले मछुआरों के लिए किसी मक्का से कम नहीं रहा। सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
माउंट ड्रुइट से आए एक मछुआरे ने कहा, “यह जगह अब सुपर पॉपुलर हो गई है। लोग यहां सैल्मन, स्क्विड और गर्मियों में किंगफिश पकड़ने आते हैं।”
स्थानीय लोग नाखुश, गंदगी बनी समस्या
लेकिन हर अच्छी चीज़ के साथ कुछ समस्याएं भी आती हैं। स्थानीय निवासियों ने मछुआरों पर घाट पर कूड़ा-कचरा छोड़ने और एक साथ कई-कई रॉड्स इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। एक स्थानीय नागरिक ने लिखा, “यह नई जगह पहले ही बर्बाद हो चुकी है। मछुआरे कोई जिम्मेदारी नहीं दिखा रहे।”
इस बढ़ती गंदगी और अव्यवस्था को देखकर NSW Fisheries को सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी करनी पड़ी। उन्होंने लिखा, “यह देखकर अच्छा लग रहा है कि इतने लोग मछली पकड़ने आ रहे हैं, लेकिन साफ-सफाई और ज़िम्मेदारी भी ज़रूरी है।”
500,000 डॉलर सालाना का रखरखाव खर्च – लेकिन नतीजा शून्य
इन घाटों की देखरेख पर सरकार हर साल आधे मिलियन डॉलर से ज़्यादा खर्च कर रही है, जबकि फेरी सेवा की कोई गारंटी नहीं है। पिछले साल जुलाई में Transport for NSW ने ऑपरेटर के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन कोई भी आवेदन नहीं आया।
क्या कहता है यह सब?
ला पेरूज़ का मामला सरकार की खराब योजना, सोशल मीडिया की ताकत और स्थानीय बनाम बाहरी टकराव की एक दिलचस्प मिसाल बन गया है। जहां एक ओर मछुआरों और पर्यटकों के लिए यह जगह ‘हॉटस्पॉट’ बन चुकी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग और टैक्सपेयर इसका खामियाज़ा भुगत रहे हैं।