इजरायली रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई “रोकथाम के उद्देश्य से” की गई है।
बयान में कहा गया कि इजरायल को अपनी सुरक्षा के खिलाफ “तत्काल और गंभीर खतरे” की जानकारी मिली थी, जिसके बाद यह सैन्य कदम उठाया गया।
हालांकि इजरायल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हमले का निशाना कौन-से ठिकाने थे, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि संभावित सैन्य या रणनीतिक ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया हो सकता है।
इजरायल और ईरान के बीच दशकों पुराना वैचारिक और रणनीतिक टकराव रहा है।
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है।
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
सीरिया, लेबनान और गाजा क्षेत्र में दोनों देशों के समर्थित गुटों के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष होता रहा है।
हाल के महीनों में क्षेत्रीय गतिविधियों और सैन्य तैयारियों ने तनाव को और बढ़ाया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला उसी बढ़ते टकराव का परिणाम हो सकता है।
इस हमले के बाद वैश्विक समुदाय में चिंता बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है।
यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा हालात पर पड़ सकता है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि ईरान इस हमले का किस प्रकार जवाब देता है।
तेहरान में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और उच्च स्तरीय आपात बैठकें जारी हैं।
पश्चिम एशिया पहले से ही कई संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे में यह घटनाक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।