सिडनी। सोशल मीडिया पर एक साधारण ‘लाइक’ किसी की किस्मत बदल सकता है — ऑस्ट्रेलिया की एक पारिवारिक अदालत के हालिया मामले में यही हुआ, जब इंस्टाग्राम पर की गई पोस्टों ने अदालत में एक व्यक्ति का झूठ उजागर कर दिया।
कथित तौर पर एक व्यक्ति ने अदालत में वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देते हुए अपने पूर्व जीवनसाथी को $100,000 कम भुगतान करने की कोशिश की। लेकिन उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई लक्ज़री छुट्टियों और महंगी गाड़ियों की तस्वीरों ने उसकी सच्चाई उजागर कर दी। अदालत ने इन पोस्टों को “विश्वसनीय डिजिटल साक्ष्य” मानते हुए उसकी दलीलें खारिज कर दीं।
परिवार कानून विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल सोशल मीडिया पर डाली गई सामग्री — चाहे वह पोस्ट, टिप्पणी या ‘लाइक’ ही क्यों न हो — अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
सिडनी स्थित फैमिली लॉ एक्सपर्ट एड्रिएन थॉमसन के अनुसार, “कई लोग यह समझते हैं कि उनका ऑनलाइन व्यवहार निजी है, लेकिन पारिवारिक विवादों में यह सबूत बन सकता है। यहां तक कि किसी नकारात्मक टिप्पणी को ‘लाइक’ करना भी अदालत में आपके चरित्र और रवैये का संकेत माना जा सकता है।”
वकीलों का कहना है कि तलाक, अभिभावक अधिकार और संपत्ति विवाद जैसे मामलों में अब सोशल मीडिया खातों की जांच एक आम प्रथा बनती जा रही है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर डाली गई तस्वीरें, कमेंट्स और स्टोरीज़ कई बार पक्षों के वित्तीय या भावनात्मक दावों को गलत साबित कर देती हैं।
कानूनी जानकारों ने लोगों को चेताया है कि वे सोशल मीडिया पर कुछ भी साझा करने से पहले सोच-समझकर कदम उठाएँ।
“अदालतें अब डिजिटल व्यवहार को उतनी ही गंभीरता से लेती हैं जितना मौखिक बयानों को,” थॉमसन ने कहा। “ऑनलाइन दुनिया में एक क्लिक भी ऑफलाइन नतीजों को बदल सकता है।”