नई दिल्ली। क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS) द्वारा जारी ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी एशिया रैंकिंग 2026’ में भारत के कई उच्च शिक्षण संस्थानों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस सूची में पांच आईआईटी, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कुल सात भारतीय संस्थान एशिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज़ में जगह बनाने में सफल रहे हैं।
रैंकिंग के अनुसार, आईआईटी दिल्ली ने 59वां स्थान हासिल किया है, जबकि आईआईएससी बेंगलुरु 64वें पायदान पर है। इनके बाद आईआईटी मद्रास (70), आईआईटी बॉम्बे (71), आईआईटी कानपुर (77) और आईआईटी खड़गपुर (77) शामिल हैं। इसके अलावा, आईआईटी रुड़की (114) और आईआईटी गुवाहाटी (115) ने भी टॉप 200 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
कुल मिलाकर, सात भारतीय संस्थान टॉप 100, 20 टॉप 200 और 66 टॉप 500 में शामिल हुए हैं। यह भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है। पिछले साल की तुलना में 36 भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में सुधार हुआ है, जबकि 16 की स्थिति बरकरार रही और 105 संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट आई है।
क्यूएस ने कहा कि इस साल रैंकिंग का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे अधिक प्रतिस्पर्धा और अस्थिरता देखी गई। फिर भी, भारत के 41 संस्थान शीर्ष 80 प्रतिशत विश्वविद्यालयों के समूह में शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पीएचडी कर्मियों के मामले में भारत एशिया में सबसे ऊपर है। यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की मजबूत नींव और अनुसंधान-उन्मुख नीति का प्रमाण है।
क्यूएस की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा, “भारत में उच्च शिक्षा क्षेत्र में बदलाव अब आंकड़ों में साफ झलकने लगा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के सिर्फ पांच साल में, भारत ने ऐसी प्रणाली-स्तरीय क्षमता विकसित की है जो वैश्विक रूप से प्रासंगिक और स्थानीय रूप से सशक्त है।”
इस बार एशिया में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ ने पहला स्थान हासिल किया है, जिसने पिछली बार की विजेता पेकिंग यूनिवर्सिटी (चीन) को पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि हॉन्गकॉन्ग की पांच यूनिवर्सिटीज़ टॉप 10 में हैं।
रैंकिंग में सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटीज़ चीन (395) की हैं, जबकि भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के संस्थानों ने भी सूची में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।