नई दिल्ली — भारत और बांग्लादेश के बीच 56वीं महानिदेशक-स्तरीय सीमा वार्ता इस महीने 25 से 28 अगस्त तक ढाका के पिलखाना स्थित बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) मुख्यालय में आयोजित होगी। यह वार्ता विशेष महत्व रखती है, क्योंकि पिछले वर्ष शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल की यह पहली ढाका यात्रा होगी।
बीएसएफ महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन वार्ताओं में हिस्सा लेगा। बैठक में 4,096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाले विभिन्न सीमा-पार अपराधों पर चर्चा की जाएगी। बीएसएफ की ओर से अवैध घुसपैठ का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यह वार्ता मूल रूप से जुलाई में प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे अगस्त के लिए स्थगित किया गया। बैठक में बीएसएफ यह भी बताएगा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपने जवानों को लगभग 5,000 बॉडी-वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि सीमा पर हिंसा, अवैध गतिविधियों और हमलों के पुख्ता सबूत एकत्र किए जा सकें। हालांकि, बांग्लादेश में अंतरिम सरकार होने के कारण इस दौर की वार्ता से किसी बड़े नीतिगत फैसले की उम्मीद कम है।
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने हाल ही में घोषणा की है कि देश में आम चुनाव फरवरी 2026 में होंगे। यह घोषणा शेख हसीना सरकार के सत्ता से बेदखल होने की पहली वर्षगांठ पर की गई।
पिछले फरवरी में दिल्ली में हुई वार्ता के दौरान, दोनों देशों के सीमा बलों ने अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर नया संचार तंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया था और सीमा पर बाड़ लगाने के लिए लगभग 99 नए क्षेत्रों की पहचान की थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा का 864.48 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है, जिसमें 174.51 किलोमीटर का कठिन भूभाग शामिल है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पांच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है— पश्चिम बंगाल (2,217 किमी), त्रिपुरा (856 किमी), मेघालय (443 किमी), असम (262 किमी) और मिजोरम (318 किमी)। इस सीमा की सुरक्षा और खुफिया निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी बीएसएफ के पास है।
महानिदेशक-स्तरीय यह सीमा वार्ता 1975 से 1992 तक हर वर्ष आयोजित होती थी, लेकिन 1993 से इसे द्विवार्षिक कर दिया गया है, जिसमें दोनों देश बारी-बारी से वार्ता की मेजबानी करते हैं।