नई दिल्ली। भारत की सैन्य क्षमताओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार को ‘मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क’ जारी किया। इस नीतिगत दस्तावेज का उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में क्वांटम तकनीकों के समन्वित और प्रभावी उपयोग को बढ़ाना है, ताकि भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत को तकनीकी बढ़त मिल सके।
यह नीति ढांचा तीनों सेनाओं में क्वांटम तकनीक के चरणबद्ध समावेशन के लिए स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। दस्तावेज के अनुसार, तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में उन्नत तकनीकों का अपनाया जाना अब अनिवार्य हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है, जिससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा दे सके।
नीति जारी करने के अवसर पर शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रहा। इसमें नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह तथा चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित शामिल थे।
इस नीति के तहत चार मुख्य क्षेत्रों में क्वांटम तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
क्वांटम कम्युनिकेशन: अत्यंत सुरक्षित और तेज सैन्य संचार के लिए।
क्वांटम कंप्यूटिंग: जटिल सैन्य गणनाओं, रणनीतिक विश्लेषण और निर्णय प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए।
क्वांटम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी: सटीक निगरानी, नेविगेशन और माप क्षमताओं को बेहतर करने के लिए।
क्वांटम मटीरियल व डिवाइस: उन्नत रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के विकास हेतु।
नीतिगत दस्तावेज में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के साथ-साथ सिविल–मिलिट्री सहयोग को भी अहम बताया गया है। इसमें अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करने की रणनीति शामिल है, जिससे क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की जा सके।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता निर्णायक भूमिका निभाएगी। ऐसे में क्वांटम तकनीक को अपनाना भारत की सुरक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।