बेंगलुरु की महिला में मिला विश्व का पहला नया दुर्लभ ब्लड ग्रुप — ‘CRIB’

बेंगलुरु की महिला में मिला विश्व का पहला नया दुर्लभ ब्लड ग्रुप — ‘CRIB’

बेंगलुरु, 31 जुलाई 2025: भारत ने चिकित्सा विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कर्नाटक के कोलार ज़िले की एक 38 वर्षीय महिला के रक्त में एक नवीन, अब तक अज्ञात ब्लड ग्रुप एंटीजन की पहचान हुई है। इस अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप को “CRIB” नाम दिया गया है, जो अब दुनिया का पहला और एकमात्र ज्ञात मामला है।

यह खोज न केवल भारत के लिए गौरव का विषय है, बल्कि वैश्विक चिकित्सा जगत में भी एक क्रांतिकारी मील का पत्थर मानी जा रही है।


🔬 कैसे हुआ खोज का खुलासा?

महिला की एक हृदय संबंधी सर्जरी से पूर्व जब सामान्य ब्लड टाइपिंग की गई, तो उसे O Rh-Positive ब्लड ग्रुप का माना गया। किंतु, जब ऑपरेशन के लिए O+ डोनर यूनिट्स मंगाई गईं, तो सभी ब्लड यूनिट्स असंगत (incompatible) पाई गईं।

इस पर मामला Rotary Bangalore TTK Blood Centre को सौंपा गया और आगे की जांच के लिए रक्त के नमूने UK स्थित International Blood Group Reference Laboratory (IBGRL) को भेजे गए।

लगभग एक वर्ष की गहन जांच के बाद IBGRL ने पुष्टि की कि महिला के रक्त में एक नया एंटीजन मौजूद है, जिसे CRIB नाम दिया गया है — CR (Cromer सिस्टम), I (India), और B (Bangalore) को मिलाकर।


🩸 CRIB ब्लड ग्रुप क्या है और क्यों है विशेष?

  • मानक ABO-Rh सिस्टम के अतिरिक्त मानव रक्त में सैकड़ों प्रकार के एंटीजन पाए जाते हैं। CRIB एक ऐसा नया एंटीजन है जो अब तक किसी भी मानव में दर्ज नहीं किया गया था।

  • इस महिला का रक्त किसी भी सामान्य O+ डोनर के खून से मेल नहीं खा रहा था — जिससे पता चला कि उसका रक्त पूरी तरह से अद्वितीय है।

  • चिकित्सा दृष्टि से यह बेहद गंभीर स्थिति है, क्योंकि भविष्य में इस महिला को रक्त संक्रमण की आवश्यकता पड़ने पर कोई भी आम रक्त यूनिट उपयुक्त नहीं होगी — सिवाय उसकी अपनी रक्त यूनिट के।


🇮🇳 भारत में दुर्लभ रक्त समूहों की चुनौती

  • भारत में पहले भी बॉम्बे ब्लड ग्रुप और Rh-null (Golden Blood) जैसे अत्यंत दुर्लभ रक्त समूह पाए गए हैं, जिनकी उपलब्धता 1:10,000 से भी कम है।

  • अब सरकार और संस्थाएं मिलकर Rare Donor Registry (RDRI) को e‑Rakt Kosh से जोड़ रही हैं, ताकि देशभर में दुर्लभ रक्त की जानकारी एकीकृत और रीयल‑टाइम में साझा की जा सके।

⚠️ प्रमुख चुनौतियाँ:

  • उन्नत उपकरणों और जीनोटाइपिंग सुविधा की कमी

  • प्रशिक्षित मैनपावर का अभाव

  • जनजागरूकता की अत्यंत आवश्यकता

  • रक्तदान सेवाओं का विकेन्द्रीकरण