भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2025 न केवल रोमांच से भरपूर रही, बल्कि इसने टेस्ट क्रिकेट में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज किए। पांच मैचों की इस सीरीज में जहां दोनों टीमों ने दो-दो मैच जीते, वहीं मैनचेस्टर में खेला गया चौथा मुकाबला ड्रॉ रहा। यह सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुई, लेकिन इसके आँकड़े क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद रखे जाएंगे।
इस सीरीज में कुल 175 विकेट गिरे, जिनमें 45 बार बल्लेबाज बोल्ड हुए, जो 21वीं सदी में किसी भी टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी भारत-इंग्लैंड के नाम था, जब 2024 की सीरीज में 39 बार खिलाड़ी बोल्ड हुए थे।
भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने मात्र तीन टेस्ट में खेलते हुए 10 खिलाड़ियों को बोल्ड किया, जो सबसे अधिक है। वहीं मोहम्मद सिराज ने पूरे पांच टेस्ट खेलते हुए 23 विकेट लिए और इंग्लैंड में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा एक सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने के बुमराह के रिकॉर्ड की बराबरी की।
कुल बनाए गए रन: 7187 रन — एक टेस्ट सीरीज में दूसरे सबसे ज्यादा।
टीम स्कोर 300+ : 14 बार — संयुक्त रूप से सर्वाधिक।
400+ रन बनाने वाले बल्लेबाज: 9 — सर्वाधिक।
व्यक्तिगत 50+ स्कोर: 50 बार — संयुक्त रूप से सर्वाधिक।
टेस्ट शतक: 21 — संयुक्त रूप से सर्वाधिक।
शतकीय साझेदारियां: 19 बार — संयुक्त रूप से सर्वाधिक।
भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने 754 रन बनाकर भारत की ओर से किसी एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने सुनील गावस्कर (732) और ग्रहाम गूच (752) को पीछे छोड़ा।
इंग्लैंड के दिग्गज जो रूट ने ओवल टेस्ट की दूसरी पारी में 104 रन बनाकर भारत के खिलाफ अपना 13वां टेस्ट शतक जड़ा। यह उनके करियर का 16वां शतक था। उन्होंने सुनील गावस्कर (वेस्टइंडीज के खिलाफ 13 शतक) और स्टीव स्मिथ (भारत के खिलाफ 13 शतक) की बराबरी की।
साथ ही रूट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में 6000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं।
भारत ने द ओवल टेस्ट में इंग्लैंड को महज 6 रनों से हराकर अपनी टेस्ट इतिहास की रनों के लिहाज से सबसे करीबी जीत दर्ज की। इससे पहले 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुंबई टेस्ट में 13 रनों की जीत भारत की सबसे करीबी जीत थी।
यह लगातार चौथी टेस्ट सीरीज है जिसमें इंग्लैंड भारत के खिलाफ जीत दर्ज करने में असफल रहा है। यह दौर 2018 से चला आ रहा है, और 1996-2011 के बीच इंग्लैंड का भारत के खिलाफ बिना जीत के सबसे लंबा पिछला दौर था।