यूरोप पर ‘हाइब्रिड जंग’ की शुरुआत: ड्रोन, साइबर हमले और तोड़फोड़ से हिल रही सीमाएं

यूरोप पर ‘हाइब्रिड जंग’ की शुरुआत: ड्रोन, साइबर हमले और तोड़फोड़ से हिल रही सीमाएं

कोपेनहेगन/वारसॉ।
यूरोप पर अब एक नई किस्म की जंग थोप दी गई है — ऐसी जंग, जिसमें बंदूकें नहीं, बल्कि ड्रोन, साइबर हमले और अंदरूनी तोड़फोड़ हथियार बने हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा है कि यूरोप पहले से ही “हाइब्रिड वॉर” का सामना कर रहा है, और यह अभी शुरुआत भर है।

पिछले कुछ हफ्तों में यूरोपीय देशों में कई रहस्यमय घटनाएँ हुईं —

  • कोपेनहेगन हवाई अड्डे के ऊपर अनजान ड्रोन मंडराए, जिससे हवाई यातायात चार घंटे के लिए ठप रहा।

  • रूस का एक कार्गो जहाज़ जब्त किया गया।

  • चीनी नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया जो एक नाटो बेस के पास बिना चालक वाले विमान उड़ा रहे थे।

  • वहीं, बेलारूस द्वारा पकड़े गए हजारों प्रवासियों को यूरोपीय सीमाओं में धकेला जा रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन घटनाओं को “पश्चिमी देशों की हिस्टीरिया” बताया और कहा कि “पश्चिम को शांत रहना चाहिए।”


डर और अस्थिरता फैलाने की रणनीति

प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन के अनुसार, हाइब्रिड युद्ध का असली मकसद किसी देश को सीधे नहीं बल्कि भीतर से कमजोर करना है।

“कभी ड्रोन भेजना, कभी साइबर हमला करना, कभी तोड़फोड़ — यही इस युद्ध की चाल है,” उन्होंने कहा।

लातविया के रक्षा मंत्री एंड्रिस स्प्रूड्स ने भी चेताया —

“हम औपचारिक रूप से युद्ध में नहीं हैं, पर शांति में भी नहीं। यह हाइब्रिड वॉरफेयर है — जहाँ प्रवासियों का इस्तेमाल हथियार की तरह, झूठी सूचनाएँ फैलाकर और साइबर हमलों के ज़रिए देशों को अस्थिर किया जा रहा है।”


हर दिन नई उकसावे की घटना

यूरोप के दस देशों ने रूस पर हाल में अपने हवाई क्षेत्र में बार-बार घुसपैठ करने के आरोप लगाए हैं।
सीईपीए (Centre for European Policy Analysis) के विशेषज्ञ फुआद शाहबाज़ोव के अनुसार,

“यह छाया युद्ध (shadow warfare) है। सभी को पता होता है कि पीछे कौन है, लेकिन तुरंत सबूत नहीं मिलते। नतीजा — जनता का भरोसा कमजोर होता है और सरकारें असहाय दिखती हैं।”


साइबर, ड्रोन और समुद्र के नीचे की जंग

रिपोर्टों के मुताबिक, समुद्र के नीचे इंटरनेट और पावर केबल्स काटे जा रहे हैं, सप्लाई नेटवर्क में आगजनी की जा रही है, और साइबर हमलों से सरकारी तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है।
यूरोपीय नेता इस खतरे का सामना करने और यूक्रेन को और मजबूत समर्थन देने के लिए लगातार बैठकों में जुटे हैं।