नई दिल्ली।
केंद्र सरकार देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल को सस्ता, नैतिक और सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। यह बात केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को जागरण न्यू मीडिया द्वारा आयोजित ‘एआई के नैतिक उपयोग और साक्षरता’ सम्मेलन में कही।
मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का फोकस ऐसे भारतीय एआई मॉडल विकसित करने पर है, जो निष्पक्ष, पारदर्शी हों और डेटा गोपनीयता के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग आने वाले समय में चिकित्सा, शिक्षा, कृषि सहित हर क्षेत्र में बढ़ेगा और इससे बचा नहीं जा सकता।
नैतिक और न्यायसंगत उपयोग पर जोर
जितिन प्रसाद ने एआई के नैतिक पहलुओं पर विस्तार से बात करते हुए इसके न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ केवल चुनिंदा वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचे। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल तकनीक को लोकतांत्रिक बनाया जाए, ताकि हर नागरिक इसके फायदे समझ सके और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस कर सके।
डीपफेक पर जताई चिंता
चुनाव के दौरान डीपफेक वीडियो के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में इस तरह की तकनीक का दुरुपयोग गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने कंटेंट पर वॉटरमार्क अनिवार्य करने जैसे उपायों की आवश्यकता बताई, ताकि फर्जी और भ्रामक सामग्री की पहचान आसान हो सके।
‘नया भारत’ की दिशा में कदम
मंत्री ने कहा कि यह ‘नया भारत’ है, जो तकनीक के माध्यम से सशक्त हो रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। सरकार का मानना है कि जब तक एआई और डिजिटल तकनीक गांव-गांव तक नहीं पहुंचेगी, तब तक उसका वास्तविक लाभ समाज को नहीं मिल पाएगा।