गाज़ा में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सोमवार को इज़रायल की सेना (IDF) ने गाज़ा सिटी पर ज़मीनी हमला शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रातभर "भारी और लगातार बमबारी" होती रही, जिसमें कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए।
रिपोर्टों के अनुसार, इज़रायली सैनिक गाज़ा सिटी में दाखिल हो चुके हैं और और भी टुकड़ियाँ भेजी जा रही हैं। हमला उत्तरी इलाक़ों से शुरू हुआ है, जहां पिछले कुछ दिनों में ऊँची इमारतों को निशाना बनाया गया था।
एक इज़रायली अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि यह ज़मीनी अभियान "धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से" आगे बढ़ाया जाएगा।
इज़रायल के रक्षा मंत्री इसराइल कैट्ज़ ने सोशल मीडिया पर लिखा –
"गाज़ा जल रहा है। आईडीएफ़ आतंकवादियों के ढांचे पर लोहे की मुट्ठी से प्रहार कर रहा है और हमारे सैनिक बंधकों की रिहाई और हमास की हार सुनिश्चित करने के लिए बहादुरी से लड़ रहे हैं। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक मिशन पूरा नहीं हो जाता।"
संयुक्त राष्ट्र आयोग ने अपनी जांच में कहा है कि इज़रायल ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जनसंहार (Genocide) किया है। उधर, मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि गाज़ा पर कब्ज़ा हालात और बिगाड़ देगा।
हालाँकि, इज़रायल ने पहले दावा किया था कि ज़मीनी कार्रवाई से पहले नागरिकों को सुरक्षित दक्षिणी क्षेत्र में भेजा जाएगा, लेकिन बहुत कम लोग ही वहाँ तक पहुँच पाए हैं। गाज़ा के एक 25 वर्षीय युवक ने बताया कि "ख़तरा हर पल बढ़ रहा है" और उसने मलबे के नीचे दबे लोगों की चीखें सुनी हैं।
इज़रायल में बंधकों के परिवारों ने भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपील की है कि गाज़ा पर हमले बंद किए जाएँ, क्योंकि अभी भी लगभग 20 इसराइली बंधक ज़िंदा माने जा रहे हैं। परिवारों को डर है कि लगातार हो रहे हमलों में उनके प्रियजन मारे जा सकते हैं।