नई दिल्ली, 24 अगस्त।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वैज्ञानिकों और युवाओं को नया लक्ष्य देते हुए कहा कि भारत अब चंद्रमा और मंगल की उपलब्धियों के बाद गहन अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि अंतरिक्ष के अज्ञात रहस्यों को समझना न केवल विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानवता के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम भी होगा।
शनिवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
"चंद्रमा और मंगल तक हमारी यात्रा सफल रही है। अब समय है कि हम गहन अंतरिक्ष में झांकें और वहां छिपे रहस्यों को उजागर करें।"
उन्होंने इसे भारत की “नए युग की शुरुआत” करार दिया और वैज्ञानिकों से ऐसे मिशनों की योजना तैयार करने का आग्रह किया जो मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि भारत अब “अंतरिक्षयात्री पूल” (Astronaut Pool) तैयार कर रहा है। इस पहल के तहत युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि भविष्य में वे अंतरिक्ष अभियानों का हिस्सा बन सकें।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे साहस और कौशल के साथ इस मिशन में शामिल हों। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारतीय युवा अंतरिक्ष अनुसंधान में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं।
गौरतलब है कि 23 अगस्त 2023 को भारत ने इतिहास रचते हुए चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इस अभूतपूर्व उपलब्धि की याद में हर साल 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता ने भारतीय वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी और पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर आकर्षित किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले दशक में भारत न केवल अपने अंतरिक्ष अभियानों को और विस्तृत करेगा, बल्कि वैश्विक सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने गगनयान मिशन, मंगल और शुक्र ग्रह अभियानों सहित भविष्य के लक्ष्यों पर भरोसा जताते हुए कहा कि गहन अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत अग्रणी बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का अगला बड़ा पड़ाव युवाओं की भागीदारी से तय होगा। गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए न केवल तकनीकी क्षमता बल्कि साहस, समर्पण और दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होगी, जिसमें देश के युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
👉 यह घोषणा न केवल भारतीय वैज्ञानिक समुदाय बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गर्व और प्रेरणा का विषय है। चंद्रयान से लेकर गहन अंतरिक्ष की यात्रा भारत को उस मुकाम पर पहुंचा सकती है, जहां से वह मानव सभ्यता के भविष्य को दिशा देने वाला देश बन सके।