भारत के 8 राज्यों के हिस्सों को 'ग्रेटर बांग्लादेश' नक्शे में दिखाने पर विदेश मंत्री का कड़ा जवाब, संसद में उठाया गया मामला

भारत के 8 राज्यों के हिस्सों को 'ग्रेटर बांग्लादेश' नक्शे में दिखाने पर विदेश मंत्री का कड़ा जवाब, संसद में उठाया गया मामला

'ग्रेटर बांग्लादेश' नामक विवादास्पद नक्शे को लेकर संसद में बड़ा सवाल उठा है। इस नक्शे में भारत के आठ राज्यों – पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड, ओडिशा और अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों के हिस्सों को कथित रूप से बांग्लादेश का हिस्सा बताया गया है। यह मामला गुरुवार को कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा राज्यसभा में उठाया गया, जिस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को जवाब दिया।

जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने इस नक्शे और इसे बढ़ावा देने वाले संगठनों पर गंभीरता से ध्यान दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि 'सल्तनत-ए-बांग्ला' नामक एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन, जो ढाका में सक्रिय है, ने इस नक्शे को जारी किया है। यह समूह ढाका विश्वविद्यालय के शिक्षक-छात्र केंद्र (टीएससी) में एक कार्यक्रम के दौरान इस नक्शे को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर चुका है।

तुर्की और पाकिस्तान से कथित संबंध

विदेश मंत्री ने बताया कि इस संगठन को तुर्की के एक एनजीओ 'टर्किश यूथ फेडरेशन' का समर्थन प्राप्त है, जो इसे वैचारिक और आर्थिक सहायता देता है। इसके अलावा, भारतीय खुफिया एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस समूह को वित्तीय सहायता दीना अफरोज यूनुस से मिलती है, जो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस की बेटी हैं। वह 'सीएसएस-बांग्लादेश' नामक एक एनजीओ की प्रमुख वित्तदाता मानी जा रही हैं, जिसे इस संगठन की एक शाखा ‘बरवाह-ए-बंगाल’ के रसद और भर्ती केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

जयशंकर ने कहा कि यह संगठन मध्यकालीन बंगाल सल्तनत की विरासत का हवाला देकर बांग्लादेश के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रहा है और ग्रेटर बांग्लादेश की विचारधारा को प्रचारित कर रहा है।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जयशंकर ने संसद में कहा, "सरकार ने उन रिपोर्ट्स पर संज्ञान लिया है जिनमें बताया गया है कि ढाका स्थित एक इस्लामी समूह ‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ ने ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा जारी किया है, जिसमें भारत के हिस्से शामिल हैं। यह नक्शा ढाका विश्वविद्यालय में प्रदर्शित किया गया था। हमने इस मुद्दे को कूटनीतिक रूप से गंभीरता से लिया है।"

राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव की आशंका

इस घटनाक्रम ने न केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की संभावना बढ़ा दी है, बल्कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान व तुर्की के संभावित हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता गहरा दी है। यूनुस सरकार पर पहले से ही जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों को राजनीतिक वैधता देने के आरोप हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके शासन में पाकिस्तान को वीज़ा नियमों में ढील और समुद्री मार्ग की सुविधा तक प्रदान की गई है।