अहमदाबाद/गांधीनगर, 18 फरवरी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सहकारिता ढांचे को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित इस मंथन बैठक में ‘सहयोग से खुशहाली’ के विज़न को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में तकनीक के अधिकतम उपयोग, सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने तथा सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
अमित शाह ने गुजरात में 265.30 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का ई-लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, उनमें—
नर्मदा खंड उद्योग सहकारी मंडल का एथनॉल डिस्टिलरी संयंत्र
30 मेगावाट क्षमता का बिजली उत्पादन संयंत्र
जैविक पोटाश संयंत्र
दो आधुनिक भंडार गृह
अमूल का व्हे प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर संयंत्र
एक कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) परिसर
इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विभिन्न राज्यों में लागू की गई सहकारिता की बेहतर कार्यप्रणालियों और ‘अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025’ पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट भी जारी की।
बैठक के उद्घाटन सत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी तथा केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल पर आयोजित विशेष प्रदर्शनी में देश के प्रमुख सहकारी संगठनों ने अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। इसमें National Dairy Development Board (एनडीडीबी), Amul, Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited (इफको) और Banas Dairy सहित लगभग 20 बड़े संगठनों ने भाग लिया।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि सहकारिता मॉडल को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। तकनीक आधारित प्रबंधन और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने की रणनीति पर सहमति बनी।
सरकार का मानना है कि सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण से न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।