स्कूलों में सनस्क्रीन ब्रेक अनिवार्य करने की मांग, डॉक्टरों का सरकार से आग्रह

स्कूलों में सनस्क्रीन ब्रेक अनिवार्य करने की मांग, डॉक्टरों का सरकार से आग्रह

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के 650 से अधिक डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्कूलों में बच्चों के लिए पांच मिनट का अनिवार्य सनस्क्रीन ब्रेक शुरू करने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटा-सा कदम भविष्य में हज़ारों ज़िंदगियाँ बचा सकता है

डॉक्टरों के इस समूह ने शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को एक खुला पत्र लिखकर अपील की है कि लंच टाइम की शुरुआत में सभी छात्रों को दोबारा सनस्क्रीन लगाने के लिए समय दिया जाए

पत्र में कहा गया है कि सुबह लगाया गया सनस्क्रीन दोपहर तक असर खो देता है, जबकि बच्चे ठीक उसी समय बाहर खेलते हैं जब यूवी किरणें सबसे ज़्यादा खतरनाक होती हैं। ऐसे में टोपी के अलावा उनके पास कोई प्रभावी सुरक्षा नहीं रहती।

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ त्वचा कैंसर की दर सबसे अधिक है। डॉक्टरों का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था बच्चों पर ज़रूरत से ज़्यादा जिम्मेदारी डालती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चार-पांच साल के बच्चों से यह उम्मीद करना कि वे खेल छोड़कर खुद सनस्क्रीन लगाएंगे, उनकी उम्र और मानसिक विकास के अनुरूप नहीं है। यह न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि स्कूलों की ड्यूटी ऑफ केयर पर भी सवाल खड़ा करता है।

डॉक्टरों का मानना है कि यदि स्कूलों में यह नियम अनिवार्य किया जाता है, तो बच्चों में बचपन से ही सन-सेफ आदतें विकसित होंगी, जो आगे चलकर त्वचा कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं और इस प्रस्ताव पर राज्य व क्षेत्रीय सरकारों के साथ चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लंबे समय तक धूप में रहना त्वचा कैंसर का बड़ा कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि सनस्क्रीन को स्कूल यूनिफॉर्म और टोपी जितना ही ज़रूरी माना जाए, ताकि बच्चों को धूप से होने वाले घातक खतरों से बचाया जा सके।