बेल्थंगडी (कर्नाटक), विशेष रिपोर्ट | Hindi Gaurav
धर्मस्थल क्षेत्र में हुए सनसनीखेज मास मर्डर केस ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI (सूचना का अधिकार) के तहत मिली जानकारी ने इस मामले में पुलिस की कार्यशैली को उजागर कर दिया है, जो न केवल कानून की धज्जियां उड़ाती है बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार करती है।
RTI कार्यकर्ता जयंत, जो पिछले कई वर्षों से बेल्थंगडी क्षेत्र में पुलिस की जांच प्रक्रियाओं पर नजर रख रहे हैं, ने दावा किया है कि इस मामले में न केवल सबूत मिटाए गए, बल्कि पीड़िता के शव को "कुत्ते की तरह" दफनाया गया — बिना किसी अंतिम संस्कार, कानून प्रक्रिया या परिवार की जानकारी के।
धर्मस्थल के निकट एक संदिग्ध परिस्थितियों में एक लड़की सहित कई लोगों की सामूहिक हत्या की खबर सामने आई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या या दुर्घटना का मामला बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे RTI के दस्तावेज़ सामने आए, यह साफ़ होता गया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी जिसे दबाने की भरपूर कोशिश की गई।
शव का बिना पंचनामा किया गया अंतिम संस्कार: RTI दस्तावेजों के अनुसार, लड़की के शव को बिना परिवार को सूचित किए, रातों-रात दफन कर दिया गया।
कोई फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं: पुलिस ने न तो फॉरेंसिक जांच करवाई, न ही शव परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की।
साक्ष्यों को मिटाने के प्रयास: घटना स्थल से खून के धब्बे, कपड़े और अन्य साक्ष्य हटा दिए गए, जिससे जांच की कोई ठोस दिशा नहीं बची।
प्रशासन की चुप्पी: उच्च अधिकारियों ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है, जिससे साफ है कि मामले को दबाने का प्रयास ऊपर से किया जा रहा है।
RTI कार्यकर्ता जयंत ने कहा:
“यह मामला किसी साधारण अपराध का नहीं, बल्कि साजिशन की गई सामूहिक हत्या का है। पुलिस ने जानबूझकर सबूत नष्ट किए और प्रशासन ने आंखें मूंद लीं। यह न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।”
पीड़िता के परिजन और समाजसेवी संगठनों ने इस मामले की CBI या न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा निष्पक्ष जांच नहीं की जाती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।