नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच आवागमन को ऐतिहासिक रूप से आसान बनाने वाला दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दोनों शहरों के बीच की यात्रा महज ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी, जो अब तक 5 से 6 घंटे तक की होती थी।
करीब 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण-संवेदनशील तकनीक के साथ विकसित किया गया है। यह परियोजना न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा, ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राजाजी टाइगर रिज़र्व और अन्य वन क्षेत्रों से गुजरते समय जानवरों की निर्बाध आवाजाही के लिए विशेष वाइल्डलाइफ कॉरिडोर और अंडरग्राउंड सुरंगें बनाई गई हैं। इससे हाथी, बाघ और अन्य वन्यजीव सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक मार्गों पर आ-जा सकेंगे।
एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में एलिवेटेड रोड का निर्माण किया गया है, जिससे घनी आबादी और वन क्षेत्रों पर असर कम पड़े। इस मार्ग पर फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस रोड, आपातकालीन लेन और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। यहां वाहनों के लिए 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा निर्धारित की गई है।
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, बागपत, शामली, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और हरिद्वार जैसे जिलों से होकर गुजरता है। इससे इन क्षेत्रों के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और स्थानीय व्यापार, उद्योग तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एक्सप्रेसवे के शुरू होने से देहरादून के साथ-साथ मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को देश की सबसे आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसके चालू होने से उत्तर भारत के परिवहन नेटवर्क को नई दिशा मिलेगी और आम लोगों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।