दिल्ली में लाडली योजना बंद करने की तैयारी, नई ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ का एलान

दिल्ली में लाडली योजना बंद करने की तैयारी, नई ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ का एलान

नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार राजधानी में लंबे समय से संचालित लाडली योजना को बंद कर उसकी जगह नई योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को इसका संकेत देते हुए ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ शुरू करने का एलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा लाडली योजना में कई व्यावहारिक खामियां हैं और इसका लाभ सभी जरूरतमंद परिवारों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है, इसलिए सरकार एक नई और अधिक पारदर्शी योजना लेकर आ रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार नई योजना के तहत दिल्ली में निवास करने वाले परिवारों की अधिकतम दो बेटियों को लाभ दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत अब तक दी जा रही 36 हजार रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर 56 हजार रुपये किया गया है। साथ ही, ग्रेजुएशन पूरा करने पर योजना की मैच्योरिटी राशि कम से कम एक लाख रुपये तक होगी। पहले यह लाभ 12वीं कक्षा के बाद मिलता था।

रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि बेटियों को शिक्षा पूरी करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि इस योजना में कुछ शर्तें भी लागू की जाएंगी। यदि 18 वर्ष से पहले बेटी की शादी कर दी जाती है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

लाडली योजना को बंद करने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि लाडली जैसी सामाजिक कल्याणकारी योजना को समाप्त करना गरीब और मध्यम वर्ग की बेटियों के हितों के खिलाफ है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सुधार के नाम पर पुरानी योजनाओं को खत्म कर रही है।

वहीं, सरकार समर्थकों का कहना है कि समय के साथ योजनाओं में बदलाव जरूरी है और यदि नई योजना अधिक प्रभावी और व्यापक है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लाडली योजना को तुरंत बंद किया जाएगा या उसे चरणबद्ध तरीके से नई योजना में समाहित किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी योजना में बदलाव करते समय मौजूदा लाभार्थियों के हितों की सुरक्षा सबसे अहम होनी चाहिए, ताकि किसी को बीच में नुकसान न उठाना पड़े। सरकार की ओर से नई योजना का विस्तृत खाका सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह फैसला दिल्ली की बेटियों के भविष्य के लिए कितना लाभकारी सिद्ध होगा।


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