इंटरनेट से अपना नाम, नंबर और डेटा हटाना क्यों जरूरी हो गया है? जानिए आसान तरीका

इंटरनेट से अपना नाम, नंबर और डेटा हटाना क्यों जरूरी हो गया है? जानिए आसान तरीका

आज के दौर में जब अधिकतर ऑस्ट्रेलियाई लोगों को अनजान नंबरों से कॉल्स और स्पैम मैसेज लगातार परेशान कर रहे हैं, यह साफ संकेत है कि उनका निजी डेटा किसी न किसी ऑनलाइन डेटाबेस में पहुंच चुका है।

मोबाइल नंबर, ईमेल, पता और यहां तक कि बैंक से जुड़ी जानकारियां भी अब डेटा ब्रोकर्स के हाथों में हैं। ये डेटा ब्रोकर्स बिना आपकी अनुमति के आपकी जानकारी इकट्ठा करके उसे विज्ञापन एजेंसियों या कभी-कभी साइबर अपराधियों को बेच देते हैं। इसका सबसे बड़ा खतरा पहचान की चोरी (Identity Theft) और वित्तीय धोखाधड़ी है।

खतरा सिर्फ स्पैम कॉल का नहीं, पहचान चोरी का है

जब आपकी निजी जानकारी कई जगह बिकी होती है, तो कोई भी व्यक्ति या समूह उसे जोड़कर आपके नाम पर फर्जी लोन ले सकता है, अकाउंट खोल सकता है या आपके नाम से अपराध कर सकता है।

क्या किया जा सकता है?

ऑनलाइन मौजूदगी को सीमित करना और अपनी पहचान को हटाना अब जरूरी हो गया है। ये कुछ कदम मदद कर सकते हैं:

  1. डेटा ब्रोकर्स की वेबसाइट्स से खुद को हटाएं – “Opt-Out” सेक्शन में जाकर फॉर्म भरें और अनुरोध करें कि आपका डेटा डिलीट किया जाए।

  2. Google से जानकारी हटाने का अनुरोध करें – Google का “Remove personal information” पेज विजिट करें।

  3. पेड डेटा रिमूवल सेवाएं लें – कई कंपनियां मामूली फीस लेकर आपकी ओर से यह प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं।

  4. सोशल मीडिया गोपनीयता सेटिंग्स अपडेट करें – अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और फालतू ऐप्स को एक्सेस बंद करें।

  5. रेगुलर चेक करें – हर कुछ महीनों में Google पर अपना नाम सर्च करें और देखें कि कौन सी वेबसाइटें आपकी जानकारी दिखा रही हैं।