ट्रंप की मांग के आगे झुका NATO, 5% GDP रक्षा खर्च का मतलब 19,800 लड़ाकू विमानों की कीमत जितना बोझ

ट्रंप की मांग के आगे झुका NATO, 5% GDP रक्षा खर्च का मतलब 19,800 लड़ाकू विमानों की कीमत जितना बोझ

वाशिंगटन/ब्रसेल्स:
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लंबे समय से चली आ रही मांग के आगे अब नाटो (NATO) देशों ने घुटने टेक दिए हैं। NATO सदस्य देश अब अपने रक्षा बजट को GDP का 5 प्रतिशत तक बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं — यह एक ऐसा फैसला है जो उन्हें भारी आर्थिक दबाव में डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय लगभग 19,800 अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की अनुमानित लागत के बराबर खर्च को दर्शाता है।

यह कदम न केवल यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा बल्कि इसका प्रभाव ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों पर भी पड़ सकता है, जो रक्षा समझौतों और हथियारों के आदान-प्रदान में जुड़े हैं।

ट्रंप का दबाव और रणनीतिक बदलाव:

डोनाल्ड ट्रंप का यह मानना था कि अमेरिका NATO का सबसे बड़ा बोझ उठाता है जबकि अन्य देश अपेक्षाकृत कम खर्च करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि सदस्य देश अपने बजट नहीं बढ़ाते, तो अमेरिका NATO से हट भी सकता है। ट्रंप की इस रणनीति का नतीजा अब सामने है।

क्या होगा असर:

  • यूरोपीय देशों पर आर्थिक दबाव: बजट में भारी वृद्धि से सामाजिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

  • हथियारों की दौड़ तेज: कई देश अब नए फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम और निगरानी उपकरण खरीदने की तैयारी में हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया पर अप्रत्यक्ष असर: अमेरिका और NATO की मांगों के अनुरूप ऑस्ट्रेलिया को भी अपने रक्षा सहयोग और निर्यात रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष:

NATO का यह कदम रक्षा क्षेत्र में नई प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा और विश्व शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। जहां कुछ इसे आवश्यक सुरक्षा उपाय मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे सैन्य बजट का अतिशय विस्तार मानते हैं, जिसका आर्थिक बोझ अंततः आम जनता पर पड़ेगा।