सिडनी। सुपरमार्केट दिग्गज कोल्स (Coles) ने पिंजरे में बंद मुर्गियों के अंडों (Caged Eggs) की बिक्री पर प्रस्तावित रोक को टाल दिया है। यह निर्णय हाल ही में बर्ड फ्लू (Avian Influenza) के प्रकोप और उसके चलते उत्पन्न आपूर्ति संकट को देखते हुए लिया गया है।
पिछले वर्ष देशभर में करीब 18 लाख मुर्गियों को मारना पड़ा, जिनमें बड़ी संख्या अंडा देने वाली मुर्गियों की थी। इससे अंडों की भारी कमी हुई और सुपरमार्केट्स को ग्राहकों के लिए अंडे की खरीद पर सीमा तय करनी पड़ी। इसके बावजूद कई जगहों पर रैक खाली रह गए।
कोल्स के प्रवक्ता ने कहा कि हाल की परिस्थितियों ने अंडों की स्थिर आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है।
“हम पशु कल्याण को गंभीरता से लेते हैं, लेकिन उद्योग को उबरने और ग्राहकों के लिए स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हमने ब्रांडेड शेल एग्स को केज-फ्री बनाने का लक्ष्य 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह समयसीमा अब भी राष्ट्रीय स्तर पर तय 2036 की डेडलाइन से पहले है।”
ऑस्ट्रेलियन एग्स के मुताबिक, अभी भी सुपरमार्केट में बिकने वाले 40% अंडे पिंजरे वाले अंडे हैं। अगर इन्हें अचानक हटाया गया तो आपूर्ति संकट और दामों में तेज उछाल देखने को मिलेगा।
संस्था ने यह भी बताया कि करीब 50 साल पहले पिंजरे वाले अंडों की शुरुआत इसलिए हुई थी ताकि मुर्गियों को मौसम, परजीवियों और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों से बचाया जा सके।
दूसरी ओर, आरएसपीसीए और अन्य पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि बैटरी केज में मुर्गियों को बेहद संकुचित जगह (लगभग A4 पेपर जितनी जगह) में रखा जाता है, जिससे वे अपने स्वाभाविक व्यवहार जैसे पंख फैलाना, मिट्टी कुरेदना और घोंसला बनाना नहीं कर पातीं।