सिडनी। दुनिया की अग्रणी सॉफ़्टवेयर कंपनी एटलसियन (Atlassian) में नेतृत्व परिवर्तन की योजना अचानक संकट में पड़ गई है। कंपनी के सह-संस्थापक और सह-सीईओ माइक कैनन-ब्रुक्स ने उस वादे से पीछे हटते हुए चौंकाने वाला फैसला लिया है, जिसमें उन्होंने अपने सह-सीईओ स्कॉट फ़ार्क्वहार के साथ मिलकर पद छोड़ने की सहमति जताई थी। इस कदम के बाद कंपनी की लोकप्रिय अध्यक्ष अनु भारद्वाज का सीईओ पद पर आसीन होने का रास्ता फिलहाल बंद होता दिख रहा है।
भारतीय मूल की अनु भारद्वाज, जो लंबे समय से एटलसियन के भीतर अपनी मजबूत पकड़ और कुशल प्रबंधन शैली के लिए जानी जाती हैं, को नया सीईओ बनाए जाने की तैयारी थी। उनकी नियुक्ति से न सिर्फ कंपनी को ताज़ा नेतृत्व मिलता, बल्कि विविधता और महिला नेतृत्व को भी वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलता।
लेकिन सूत्रों के अनुसार, अंतिम क्षणों में कैनन-ब्रुक्स ने अपना मन बदल लिया और सह-सीईओ मॉडल को जारी रखने का निर्णय किया। इससे न सिर्फ भारद्वाज की संभावनाएं प्रभावित हुईं, बल्कि कंपनी के भीतर असमंजस और असंतोष का माहौल भी गहरा गया है।
एटलसियन पिछले दो दशकों से एक अनोखे मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें कैनन-ब्रुक्स और फ़ार्क्वहार सह-सीईओ के रूप में कंपनी का संचालन करते आए हैं। इस व्यवस्था ने शुरुआती दौर में कंपनी को सफलता दिलाई, लेकिन अब विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल भविष्य में स्थिरता और स्पष्ट नेतृत्व सुनिश्चित करने में बाधा बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराधिकार की स्पष्ट राह न बन पाने से निवेशकों और कर्मचारियों दोनों में अनिश्चितता का माहौल पनप सकता है।
एटलसियन जिरा (Jira), कॉनफ़्लुएंस (Confluence) और ट्रेलो (Trello) जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की वजह से वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती है। टेक उद्योग में इस कंपनी को ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी सफल कहानियों में गिना जाता है।
हालांकि, नेतृत्व में खींचतान और वादाखिलाफी जैसे घटनाक्रम से यह छवि धूमिल होने का खतरा है। विश्लेषकों का कहना है कि अनु भारद्वाज जैसे सक्षम और लोकप्रिय नेता को न चुनना कंपनी के लिए दीर्घकालिक नुकसानदेह साबित हो सकता है।
अब तक एटलसियन की ओर से इस विवादास्पद घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। लेकिन उद्योग जगत मानता है कि यह फैसला कंपनी के भविष्य की दिशा और स्थिरता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।