सिडनी और मेलबर्न में ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ रैली में बवाल

सिडनी और मेलबर्न में ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ रैली में बवाल

ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में रविवार को निकाली गई ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ रैलियों के दौरान हिंसा और झड़पों के नजारे देखने को मिले। इन रैलियों का उद्देश्य “जनसंख्या में भारी बढ़ोतरी और प्रवासी विरोध” को लेकर आवाज उठाना बताया गया, लेकिन कई जगह हालात बेकाबू हो गए।


मेलबर्न में आदिवासी कैंप पर हमला

मेलबर्न के किंग्स डोमेन क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने एक आदिवासी शिविर (कैंप सॉवरेनिटी) पर धावा बोल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा गया कि प्रदर्शनकारी, जिनमें कट्टरपंथी नेशनल सोशलिस्ट नेटवर्क के सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं, आदिवासी झंडा फाड़ते हुए “ऑसी ऑसी ऑसी, ओई ओई ओई” के नारे लगाते नजर आए।
कैंप में मौजूद लोगों ने गुहार लगाई—“कृपया हमें छोड़ दीजिए”—लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार उग्र होते रहे।


सिडनी में मंच पर नफरत भरी बयानबाज़ी

सिडनी में एक कुख्यात दक्षिणपंथी नेता जोएल डेविस ने भीड़ को संबोधित किया। डेविस, जो खुले तौर पर हिटलर की प्रशंसा कर चुका है, ने अपने भाषण में कहा कि उनके पूर्वजों ने “श्वेत ऑस्ट्रेलिया” के लिए बलिदान दिया।
उनकी इस बात पर भीड़ में विरोध के स्वर गूंज उठे और कई प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा—“नीचे उतरो, नीचे उतरो।”


पुलिस की सख्ती, कई गिरफ्तार

हिंसक झड़पों को रोकने के लिए पुलिस को मेलबर्न में मिर्ची स्प्रे और रबर की गोलियां चलानी पड़ीं। विक्टोरिया पुलिस ने बताया कि शहर में कम से कम छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।
सिडनी में एक महिला को शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया, जबकि एडिलेड में तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई।


सामाजिक सौहार्द पर सवाल

इन घटनाओं ने ऑस्ट्रेलिया में सामाजिक सौहार्द और बहुसांस्कृतिक मूल्यों पर गहरी चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता देश की छवि और आदिवासी समुदायों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा है।