देश में बाल देखभाल (चाइल्डकेयर) व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं। उच्च शिक्षा और बाल देखभाल से जुड़े नियामकों ने चेतावनी दी है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन) के कुछ छात्र वास्तव में इस पेशे के प्रति गंभीर नहीं हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और देखभाल पर सीधा असर पड़ सकता है।
नियामक संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले प्लेसमेंट छात्र केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। उन्हें न तो बच्चों के मानसिक-भावनात्मक विकास की समझ है और न ही व्यवहारिक प्रशिक्षण पर्याप्त रूप से दिया जा रहा है। एक अभिभावक ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा,
“ऐसा लगता है जैसे हम अपने बच्चे को किसी सुरक्षा लॉकर में रखकर चले जाते हैं — भरोसा तो करना पड़ता है, लेकिन मन आशंकाओं से भरा रहता है।”
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संस्थान छात्रों को बिना उचित मूल्यांकन के बच्चों के बीच भेज रहे हैं। इससे न केवल बच्चों की देखभाल की गुणवत्ता गिर रही है, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी कमजोर हो रहा है।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि संस्थानों ने मानकों में सुधार नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता रद्द करना, प्लेसमेंट पर रोक और पाठ्यक्रम की पुनर्समीक्षा जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि:
प्रशिक्षु छात्रों की कड़ी पृष्ठभूमि जांच हो
व्यावहारिक प्रशिक्षण की अवधि बढ़ाई जाए
बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल्यावस्था शिक्षा केवल डिग्री का विषय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का पेशा है। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो इसके दूरगामी सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।