राहुल गांधी की ‘डिनर पॉलिटिक्स’ में चुनावी धांधली के सबूत, INDIA ब्लॉक में रणनीतिक मंथन

राहुल गांधी की ‘डिनर पॉलिटिक्स’ में चुनावी धांधली के सबूत, INDIA ब्लॉक में रणनीतिक मंथन

नई दिल्ली, 8 अगस्त 2025 — लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार रात अपने आवास पर INDIA ब्लॉक के प्रमुख नेताओं के साथ रात्रिभोज बैठक की। इस राजनीतिक ‘डिनर पॉलिटिक्स’ का मकसद विपक्षी गठबंधन को मजबूत करना और आगामी चुनावी रणनीति पर एकजुट रुख तैयार करना था।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, शिवसेना (उद्धव गुट) के उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, सीपीआई(M) नेता सीताराम येचुरी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए।

एजेंडा और रणनीति

बैठक का मुख्य एजेंडा था—

  • बिहार में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं।

  • उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए INDIA ब्लॉक की साझा रणनीति और उम्मीदवार का चयन।

  • निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रस्तावित विरोध मार्च की तैयारी, जिसे अब 11 अगस्त को आयोजित किया जाएगा।

चुनावी धांधली के आरोप और ‘सबूत’

बैठक में राहुल गांधी ने एक पावर प्वॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए हाल के चुनावों में कथित गड़बड़ियों के आंकड़े और दस्तावेजी सबूत दिखाए।

  1. कर्नाटक में 1 लाख फर्जी वोटर — राहुल ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में होने का दावा किया, जिससे भाजपा को सीधा फायदा मिला। निर्वाचन आयोग ने इस दावे पर कांग्रेस से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है।

  2. महाराष्ट्र में ‘एक करोड़ रहस्यमय वोटर’ — राहुल ने आरोप लगाया कि वहां चुनाव आयोग ने मतदाता डेटा साझा नहीं किया और सीसीटीवी फुटेज नष्ट कर दी। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हुए हैं।”

  3. 15 लोकसभा सीटों पर धांधली का दावा — राहुल ने कहा कि कम से कम 15 सीटों पर गड़बड़ी हुई और “निर्वाचन आयोग पूरी तरह सरकार के कब्जे में है।”

  4. उत्तर प्रदेश से खंडन — यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल के आरोपों को खारिज किया, यह कहते हुए कि जिन नामों का हवाला दिया गया, वे केवल बेंगलुरु के मतदाता हैं और यूपी की मतदाता सूची में नहीं हैं।

विपक्षी एकजुटता का संदेश

रात्रिभोज के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि INDIA ब्लॉक को केवल संसद में नहीं, बल्कि जनता के बीच भी एकजुटता दिखानी होगी। बैठक का माहौल सहयोगी दलों के बीच तालमेल और साझा लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

आगे की राह

अब सभी की निगाहें 11 अगस्त के विरोध मार्च और उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति पर हैं। राहुल गांधी के इन आरोपों से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और अब यह देखना बाकी है कि निर्वाचन आयोग इन गंभीर दावों पर क्या रुख अपनाता है।