पीठ दर्द पर एंबुलेंस बुलाने का चलन बढ़ा – सालाना 40 लाख मामलों की आशंका

पीठ दर्द पर एंबुलेंस बुलाने का चलन बढ़ा – सालाना 40 लाख मामलों की आशंका

सिडनी:
अगर आपके पति अचानक दर्द में चिल्ला उठें और एंबुलेंस बुलानी पड़े, तो जान लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया में हर साल लगभग 40 लाख लोग पीठ दर्द जैसी समस्या के चलते आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का सहारा ले रहे हैं। विशेषज्ञ इसे चिंताजनक बताते हुए कह रहे हैं कि हर पीठ दर्द के लिए एंबुलेंस बुलाना जरूरी नहीं होता।

ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर (AIHW) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पीठ दर्द ऑस्ट्रेलिया में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है, जो न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली पर भी भारी दबाव डाल रहा है।

एम्बुलेंस सेवा पर भारी बोझ
हाल के वर्षों में ट्रिपल जीरो (000) पर कॉल्स में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, खासकर पीठ दर्द जैसी गैर-आपातकालीन स्थितियों के लिए। कई बार ये कॉल्स सिर्फ दर्द के असहनीय हो जाने पर होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में अस्पताल की आपात सेवा ही उचित रास्ता है।

विशेषज्ञों की राय:
फिजियोथेरेपिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि पीठ दर्द के अधिकांश मामले घरेलू देखभाल, नियमित व्यायाम, फिजियोथेरेपी और दवाइयों से ठीक किए जा सकते हैं। केवल तभी एंबुलेंस बुलाना उचित है जब दर्द अत्यधिक तेज हो, चलना-फिरना मुश्किल हो जाए, या अन्य लक्षण जैसे कमजोरी, सुन्नपन या पेशाब पर नियंत्रण न रहना दिखाई दे।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह:
स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे मामलों में पहले जीपी (जनरल प्रैक्टिशनर) या हेल्थ डायरेक्ट जैसी सेवाओं से संपर्क करें। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को उन लोगों के लिए आरक्षित रखा जा सकता है जिन्हें सच में तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष:
पीठ दर्द एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। मगर जरूरी है कि इसे समझदारी से संभाला जाए। हर दर्द के लिए एंबुलेंस का सहारा न लेकर, सही समय पर उचित चिकित्सा सलाह ली जाए, ताकि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।