बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच एनडीए गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने टिकट वितरण को लेकर नया '70 प्लस' फॉर्मूला तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं को आगामी चुनाव में टिकट न देने की तैयारी चल रही है। यदि यह फॉर्मूला लागू होता है, तो कम से कम 9 सिटिंग विधायकों की दावेदारी पर ग्रहण लग सकता है।
इस पहल का नेतृत्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया जा रहा है। दोनों दलों का मानना है कि युवा नेतृत्व को आगे लाना समय की मांग है, और पार्टी की छवि को ताजगी देना भी जरूरी है। यह फैसला संगठनात्मक मजबूती और जनता की बदलती अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है।
इस नियम से प्रभावित होने वालों में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरे शामिल हैं, जो वर्षों से विधायक रहे हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर इस फॉर्मूले को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ नेताओं का कहना है कि अनुभव की अनदेखी करना नुकसानदायक हो सकता है, जबकि अन्य इसे राजनीतिक नवाचार मान रहे हैं।
यदि '70 प्लस' फॉर्मूला पूरी तरह लागू होता है, तो कई सीटों पर नए चेहरों को मौका मिलेगा। इससे युवा नेताओं को विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल सकता है। भाजपा और जेडीयू दोनों ही युवा शक्ति पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए के अंदर इस नीति पर कितना एकमत बन पाता है। उम्मीदवार चयन में तालमेल और सीटों का बंटवारा भी इस चुनाव में चुनौतीपूर्ण रहेगा।