150 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक होने का दावा, विपक्ष ने कहा – "बांटने की राजनीति"

रीवा सांसद जनार्दन मिश्र का विवादित बयान

150 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक होने का दावा, विपक्ष ने कहा – "बांटने की राजनीति"

रीवा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रीवा सांसद जनार्दन मिश्र ने मुसलमानों को लेकर विवादित बयान देते हुए दावा किया है कि देश के लगभग 150 जिलों में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक हो चुका है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विपक्ष ने इसे समाज को बांटने वाली राजनीति करार दिया है।

सांसद ने क्या कहा

जनार्दन मिश्र ने कहा कि “भारत का बंटवारा तो 1947 में हो गया था, लेकिन असली बंटवारा अभी भी जारी है। आज स्थिति यह है कि देश के करीब 150 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं। आने वाले समय में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति के अस्तित्व से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

विपक्ष का पलटवार

मिश्र के बयान पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सांसद का यह बयान पूरी तरह से धर्म आधारित राजनीति है और समाज में तनाव फैलाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि देश की विविधता ही हमारी ताकत है, लेकिन भाजपा बार-बार इसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

समाजवादी पार्टी नेताओं ने मांग की कि सांसद मिश्र को अपने बयान पर जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद का दावा तथ्यहीन है और केवल लोगों के बीच डर और अविश्वास पैदा करने के लिए किया गया है।

भाजपा का बचाव

भाजपा के स्थानीय नेताओं ने मिश्र का बचाव करते हुए कहा कि सांसद ने सिर्फ "जनसंख्या संतुलन" पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सांसद ने जिस समस्या की ओर इशारा किया है, वह समाजशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं के लिए गंभीर चर्चा का विषय होना चाहिए।

जनार्दन मिश्र और विवाद

जनार्दन मिश्र इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। कभी सामाजिक कुरीतियों पर तीखी टिप्पणियाँ, तो कभी धार्मिक मुद्दों पर विवादित बयान देकर वे चर्चा में रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि सांसद जानबूझकर उत्तेजक बयान देते हैं ताकि सुर्खियों में बने रहें।

प्रभाव और राजनीति

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान का असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। भाजपा हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बताकर भाजपा पर निशाना साध रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि देश की जनसंख्या संरचना पर बहस नई नहीं है, लेकिन इसे चुनावी मंचों पर उठाना हमेशा विवाद पैदा करता है।