सिडनी, 16 दिसंबर 2025
ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने बॉन्डी बीच में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में बढ़ते यहूदी विरोधी अपराधों (एंटीसेमिटिज़्म) को लेकर सरकार की कार्रवाई का बचाव किया है। यह हमला हनुक्का (यहूदी पर्व) के दौरान हुआ था, जिसे लेकर देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है।
सरकार की विशेष दूत (स्पेशल एनवॉय) जिलियन सेगल ने हाल ही में कहा था कि एंटीसेमिटिज़्म के खिलाफ सरकार का संदेश और शिक्षा अभियान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने ABC रेडियो से बातचीत में कहा कि यहूदी विरोधी सोच समाज को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है और इसके खिलाफ और मज़बूत कदम उठाने की ज़रूरत है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टोनी बर्क ने कहा कि अल्बानीज़ सरकार ने संघीय स्तर पर अब तक के सबसे कड़े नफरत-विरोधी कानून लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी भी तरह की देरी नहीं की और सेगल की सिफारिशों पर लगातार काम किया जा रहा है।
बर्क ने बताया कि सरकार ने डॉक्सिंग (किसी की निजी जानकारी सार्वजनिक करना) को अपराध घोषित किया है और घृणा अपराधों से जुड़े कानूनों को और सख़्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अब नाज़ी सलामी, घृणास्पद प्रतीकों और नस्लवादी इशारों को संघीय स्तर पर अवैध कर दिया गया है।
उन्होंने हाल ही में न्यू साउथ वेल्स संसद भवन के बाहर नाज़ी सलामी देने वाले एक दक्षिण अफ्रीकी नागरिक को देश से निष्कासित किए जाने का भी हवाला दिया।
हालांकि, हमले के पीड़ितों के परिवारों में गहरा रोष देखा जा रहा है। पीड़ितों में से एक की बेटी विक्टोरिया टेप्लिट्स्की ने सरकार पर भरोसा न होने की बात कही और वरिष्ठ मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए।
टोनी बर्क ने बॉन्डी बीच जाकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां उन्हें कुछ लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाएं अभी बहुत कच्ची हैं, लेकिन घटनास्थल पर जाकर सम्मान प्रकट करना ज़रूरी था।
इस बीच, पुलिस बॉन्डी बीच हमले की जांच को आगे बढ़ा रही है और कथित हमलावरों के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया इस त्रासदी के बाद एकजुट होकर शोक मना रहा है, वहीं सरकार पर यह दबाव बढ़ रहा है कि नफरत और आतंक के खिलाफ और ठोस कदम उठाए जाएं।