कैनबरा। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP30 में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा लगभग 16 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च किए जाने का खुलासा हुआ है। इस बजट के अंतर्गत 75 सरकारी अधिकारियों को ब्राज़ील भेजा जाएगा। खर्च की राशि और अधिकारियों की संख्या को लेकर देश में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और पर्यावरण विभाग ने अकेले अपने 32 अधिकारियों की यात्रा, ठहराव और अन्य खर्चों के लिए 16 लाख डॉलर का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य विभाग ने COP30 में भाग लेने वाले अधिकारियों पर प्रति व्यक्ति लगभग 50,000 डॉलर खर्च का अनुमान लगाया है। इस राशि में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, होटल, दैनिक भत्ते, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया इस वर्ष COP सम्मेलन की मेज़बानी हासिल करने में असफल रहा। सरकार ने एडिलेड को सम्मेलन स्थल के रूप में प्रस्तावित किया था, लेकिन अंततः संयुक्त राष्ट्र ने यह आयोजन ब्राज़ील को सौंप दिया। इसके बावजूद विदेश में सम्मेलन में भागीदारी के लिए बड़े प्रतिनिधिमंडल और भारी खर्च को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
विपक्षी दलों और नीति विशेषज्ञों का कहना है कि जब देश महँगाई, आवास संकट और ऊर्जा लागत जैसी घरेलू चुनौतियों से जूझ रहा है, तब करदाताओं के धन से इस तरह का खर्च उचित नहीं ठहराया जा सकता। आलोचकों का यह भी तर्क है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वास्तविक परियोजनाओं और ज़मीनी स्तर पर निवेश की आवश्यकता है, न कि बड़े सरकारी प्रतिनिधिमंडलों पर।
वहीं सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलवायु मंचों पर ऑस्ट्रेलिया की मज़बूत उपस्थिति आवश्यक है। सरकार के अनुसार, COP जैसे सम्मेलन वैश्विक जलवायु नीतियों, उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों और वित्तीय सहयोग पर निर्णय लेने के लिए अहम होते हैं, और इनमें सक्रिय भागीदारी देश के दीर्घकालिक हित में है।
हालाँकि, प्रति अधिकारी खर्च की ऊँची लागत और प्रतिनिधिमंडल के आकार को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग तेज़ हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे सम्मेलनों के लिए अधिक सीमित और उद्देश्यपूर्ण प्रतिनिधिमंडल भेजने पर विचार किया जाना चाहिए।