ऑस्ट्रेलिया तेज़ी से कैशलेस समाज की ओर, 2030 तक नक़दी लगभग अप्रासंगिक होने की संभावना

ऑस्ट्रेलिया तेज़ी से कैशलेस समाज की ओर, 2030 तक नक़दी लगभग अप्रासंगिक होने की संभावना

सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया में नक़दी के भविष्य को लेकर बहस वर्ष 2025 में अपने चरम पर पहुँच गई थी। देशभर में नक़दी समर्थकों के विरोध-प्रदर्शन हुए, वहीं एटीएम और बैंक शाखाओं की संख्या लगातार घटती रही। इन सबके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का कैशलेस समाज बनने का रास्ता अब लगभग तय हो चुका है।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नवीनतम त्रिवार्षिक उपभोक्ता भुगतान सर्वेक्षण के अनुसार, रोज़मर्रा के लेन-देन में नक़दी का उपयोग 2007 में जहाँ लगभग 70 प्रतिशत था, वहीं 2022 तक घटकर मात्र 13 प्रतिशत रह गया। कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल भुगतान को जबरदस्त बढ़ावा मिला, जिसने इस गिरावट को और तेज़ कर दिया।

हालाँकि हाल के वर्षों में नक़दी के उपयोग में गिरावट की रफ्तार कुछ हद तक स्थिर हुई है, लेकिन समग्र रुझान अब भी डिजिटल भुगतान के पक्ष में बना हुआ है।

सरकार ने नक़दी समर्थकों को राहत देते हुए बड़े चार बैंकों के साथ यह समझौता किया है कि वे कम से कम 2027 तक अपने क्षेत्रीय बैंक शाखाएँ खुली रखें। इसके अलावा, 1 जनवरी 2026 से किराना और ईंधन बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं के लिए नक़दी स्वीकार करना क़ानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके बावजूद आरएमआईटी विश्वविद्यालय की वित्त प्रोफेसर डॉ. एंजेल झोंग का मानना है कि ये कदम केवल अस्थायी राहत हैं। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया वर्ष 2030 तक “कार्यात्मक रूप से कैशलेस” हो सकता है।

डॉ. झोंग ने कहा,
“2030 अब भी एक व्यावहारिक अनुमान है। डिजिटल भुगतान की ओर झुकाव तकनीक, व्यापारियों की प्राथमिकताओं और उपभोक्ताओं की सुविधा से प्रेरित है। यह प्रवृत्ति पलटने की संभावना कम है।”

कार्यात्मक रूप से कैशलेस समाज का अर्थ यह है कि नक़दी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक दैनिक लेन-देन कार्ड, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन ट्रांसफ़र के माध्यम से होंगे।

उन्होंने बताया कि कैशलेस प्रणाली के कई लाभ हैं, जिनमें व्यवसायों की लागत में कमी, बेहतर सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन की सटीक निगरानी शामिल है। वहीं इसके नकारात्मक पहलुओं में बुज़ुर्गों और कमज़ोर वर्गों के लिए वित्तीय बहिष्करण का ख़तरा, निजता से जुड़ी चिंताएँ और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में नक़दी भले ही उपलब्ध रहे, लेकिन उसका उपयोग धीरे-धीरे हाशिये पर चला जाएगा।