ग़ाज़ा में एंज़ैक युद्ध कब्रों को हुए नुकसान पर ऑस्ट्रेलिया की चिंता, पुनर्स्थापन का किया वादा

ग़ाज़ा में एंज़ैक युद्ध कब्रों को हुए नुकसान पर ऑस्ट्रेलिया की चिंता, पुनर्स्थापन का किया वादा

ग़ाज़ा पट्टी में जारी युद्ध के बीच एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर को गंभीर क्षति पहुँचने का मामला सामने आया है। उपग्रह चित्रों और स्वतंत्र विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि ग़ाज़ा युद्ध कब्रिस्तान के कुछ हिस्सों को हाल के वर्षों में सैन्य गतिविधियों के दौरान बुलडोज़र से समतल कर दिया गया। इस कब्रिस्तान में प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए एंज़ैक सैनिकों की कब्रें भी शामिल हैं।

यह कब्रिस्तान राष्ट्रमंडल युद्ध कब्र आयोग के अंतर्गत आता है और इसमें ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड के उन सैनिकों को दफनाया गया है जिन्होंने मध्य पूर्व में युद्ध के दौरान अपने प्राण गंवाए थे। रिपोर्टों के अनुसार, बीते दो वर्षों में हुए सैन्य अभियानों के दौरान कब्रिस्तान की संरचनाओं, समाधियों और आसपास के भूभाग को भारी नुकसान पहुँचा है।

इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कहा है कि एंज़ैक सैनिकों की कब्रें ऐतिहासिक स्मृति, बलिदान और अंतरराष्ट्रीय विरासत का प्रतीक हैं, जिनकी रक्षा और सम्मान किया जाना आवश्यक है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि युद्ध समाप्त होने और परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर क्षतिग्रस्त कब्रों के पुनर्स्थापन के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।

विशेषज्ञों और इतिहासकारों ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा है कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत अनिवार्य है। ग़ाज़ा युद्ध कब्रिस्तान को हुई क्षति ने इस बात पर भी सवाल खड़े किए हैं कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में विरासत स्थलों की सुरक्षा कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है।

अब तक इस मुद्दे पर इज़राइल की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विभिन्न वर्गों में इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया ने दोहराया है कि एंज़ैक सैनिकों की स्मृति से जुड़ी किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुँचना केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का नुकसान है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कब्रों की मरम्मत और संरक्षण का कार्य युद्ध के बाद प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।