नई दिल्ली।
देश के केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट के बाद की योजना को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद वे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों—वेद-उपनिषदों के अध्ययन और प्राकृतिक खेती—में अपना जीवन समर्पित करेंगे।
एक साक्षात्कार में अमित शाह ने कहा, "जब मैं देश का गृह मंत्री बना तो सभी ने पूछा कि अब क्या करोगे? मैं स्पष्ट था कि मैं राजनीति को सेवा का माध्यम मानता हूं। लेकिन जब रिटायर हो जाऊंगा, तब दो काम करूंगा—वेद-उपनिषदों का अध्ययन और प्राकृतिक खेती।"
शाह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति ने उन्हें हमेशा आकर्षित किया है। वे मानते हैं कि वेद और उपनिषद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की उत्कृष्ट पद्धति का आधार हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें गहराई से इन ग्रंथों को पढ़ने और समझने की इच्छा है, जिसे वे अपने रिटायरमेंट के बाद पूरा करना चाहते हैं।
प्राकृतिक खेती को लेकर शाह ने कहा कि यह केवल कृषि पद्धति नहीं बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने का माध्यम है। वह चाहते हैं कि वे खुद खेती कर किसानों को प्रेरित करें और प्रदर्शित करें कि बिना रसायन और उर्वरक के भी उपज संभव है।
शाह ने स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद भी वे सेवा कार्यों से जुड़े रहेंगे, लेकिन राजनीति से हटकर। वे चाहते हैं कि युवा पीढ़ी वेदों और भारतीय संस्कृति की ओर लौटे और खेती को एक सम्मानजनक और लाभकारी पेशा समझे।
अमित शाह का यह रिटायरमेंट प्लान दिखाता है कि उनका झुकाव केवल सत्ता और प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से भी गहरे जुड़े हुए हैं। उनकी यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शन और प्रेरणा बन सकती है।