कैनबरा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़े अब कारोबार जगत के सामने दोहरा प्रस्ताव रखने जा रहे हैं। एक ओर वे देश को जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अधिक हरित ऊर्जा और पर्यावरण-हितैषी तकनीक की राह पर ले जाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योगपतियों को राहत देने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स सुधार का संकेत भी दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री अल्बनीज़े ने साफ किया है कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में ऑस्ट्रेलिया अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करे और 2050 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करे। इसके लिए बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश, स्वच्छ तकनीक का विकास और उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए प्रोत्साहित करना ज़रूरी होगा।
उन्होंने कहा कि केवल सरकार की नीतियों से यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट जगत का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है।
जलवायु एजेंडे के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार कॉर्पोरेट टैक्स व्यवस्था में सुधार पर विचार कर रही है। लंबे समय से कारोबार जगत यह मांग करता आया है कि निवेश को प्रोत्साहित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए कर ढांचे में लचीलापन लाया जाए।
अल्बनीज़े ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ नहीं करेगी। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि व्यापार जगत जलवायु लक्ष्यों पर सरकार के साथ तालमेल बिठाने को तैयार होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति है। जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया की छवि मज़बूत करना चाहते हैं, वहीं घरेलू मोर्चे पर कारोबारियों को कम कर और सुधार का भरोसा देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह "दोतरफ़ा संदेश" है –
पर्यावरण संरक्षण को लेकर कठोर और दूरदर्शी नीति।
कारोबारी वर्ग के लिए राहत और निवेश का भरोसा।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि व्यापार जगत प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। क्या कॉर्पोरेट क्षेत्र जलवायु लक्ष्यों पर सक्रिय सहयोग देगा, या केवल कर सुधार पर ही ध्यान केंद्रित करेगा – यह आने वाले महीनों में स्पष्ट हो जाएगा।