ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (AFP) के कमिश्नर रीस केरशॉ के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि देश के सबसे ऊंचे पदों में से एक पर बैठे पुलिस अधिकारी ड्यूरल कारवां फर्जी आतंकवादी साजिश मामले के बाद इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।
हालांकि, जब कमिश्नर केरशॉ से इस्तीफे की बात पर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई पुष्टि नहीं की और चुप्पी साध ली।
एएफपी का आधिकारिक बयान:
"कमिश्नर केरशॉ ने अब तक कोई इस्तीफा नहीं दिया है और इस पर एएफपी की ओर से फिलहाल कोई और टिप्पणी नहीं की जाएगी।"
क्या है पूरा मामला?
19 जनवरी को सिडनी के ड्यूरल क्षेत्र में कथित आतंकी साजिश की खबर सामने आई थी जिसमें एक कारवां (चलती गाड़ी में रहने वाला वाहन) का इस्तेमाल कर यहूदियों को निशाना बनाने की योजना की बात कही गई थी।
हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि यह एक "आपराधिक धोखा" था और असली आतंकवादी खतरा नहीं था।
राजनीतिक घमासान भी तेज
इस घटना को लेकर पुलिस और सरकार दोनों को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
कमिश्नर केरशॉ पर आरोप लगा कि उन्होंने मामले की जानकारी प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ को समय पर नहीं दी।
सेनेट समिति में पूछे गए सवालों के जवाब में केरशॉ ने यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर दिया कि “जांच की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है।”
विपक्ष ने सरकार पर लगाया आरोप
पूर्व विपक्ष नेता पीटर डटन ने सरकार पर “राजनीतिक पर्दादारी” का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।
वहीं लिबरल सीनेटर जेम्स पैटरसन ने पूछा कि पिछली सुरक्षा घटनाओं में मंत्रियों को तुरंत क्यों बताया गया, लेकिन इस बार देरी क्यों हुई।
एएफपी की चुप्पी बनी सवालों का कारण
मार्च में एएफपी की डिप्टी कमिश्नर क्रिसी बैरेट ने साफ किया कि यह आतंकी साजिश नहीं बल्कि एक धोखाधड़ी थी, जिसके बाद एएफपी की भूमिका पर और भी सवाल उठे कि उन्होंने पब्लिक पैनिक को समय रहते क्यों नहीं रोका।
क्या केरशॉ देंगे इस्तीफा?
अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संगठन के भीतर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं कि कमिश्नर केरशॉ चार सप्ताह का नोटिस देकर पद से हट सकते हैं।