नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) की राह में सबसे बड़ी रुकावट बनकर उभरा है – भारतीय डेयरी सेक्टर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक हालिया रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाज़े खोल दिए, तो इससे देश के लगभग 8 करोड़ डेयरी किसानों को 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेयरी उद्योग दुनिया में सबसे बड़ा है और इसका आधार छोटे एवं सीमांत किसान हैं। भारत में 95% से अधिक डेयरी उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में होता है, जहां किसान 2–3 पशुओं के सहारे दूध उत्पादन करते हैं। यह न केवल उनकी आय का मुख्य स्रोत है, बल्कि पोषण और खाद्य सुरक्षा का भी आधार है।
अगर अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारत में बिना किसी प्रतिबंध के अनुमति मिलती है, तो यह सस्ते और भारी मात्रा में उपलब्ध होंगे, जिससे घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे भारत की ग्रामिण अर्थव्यवस्था को सीधा झटका लगेगा और आत्मनिर्भर भारत की मुहिम कमजोर होगी।
अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह डेयरी सहित अन्य कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार को खोले। लेकिन भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि "किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।"
SBI रिपोर्ट इस रुख को सही ठहराते हुए कहती है कि डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना जरूरी है क्योंकि यह "सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता का भी सवाल है।"
यदि विदेशी कंपनियों को बाजार में प्रवेश मिलता है, तो अमूल, मदर डेयरी जैसे भारतीय ब्रांड्स को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। यह कीमतों में गिरावट और किसानों को मिलने वाले लाभ में कटौती के रूप में सामने आएगा।
SBI की यह रिपोर्ट भारत सरकार को स्पष्ट संदेश देती है – "भारतीय किसानों की आजीविका और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए डेयरी सेक्टर में विदेशी दखल को सीमित रखना जरूरी है।" भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तब तक संभव नहीं जब तक डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संतुलन नहीं बैठता।