सिडनी/दमिश्क, 17 फरवरी 2026।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने सीरिया के शरणार्थी शिविर से ऑस्ट्रेलिया लौटने की कोशिश कर रहीं आईएसआईएस से जुड़ी महिलाओं और उनके परिवारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार इन लोगों को वापस लाने में कोई मदद नहीं करेगी।
जानकारी के अनुसार, करीब 11 परिवारों की 30 से अधिक महिलाएं और बच्चे सीरिया के उत्तर-पूर्व में स्थित अल-रोज (Al Roj) कैंप से सोमवार को निकले थे। उनका उद्देश्य पहले लेबनान के बेरूत पहुंचना और वहां से ऑस्ट्रेलिया जाना था। हालांकि, दमिश्क से लगभग 50 किलोमीटर दूर ही उनके काफिले को रोक दिया गया और वापस कैंप भेज दिया गया।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, परिवारों के रिश्तेदारों और दमिश्क प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण यात्रा रोक दी गई। अधिकारियों ने कहा कि यात्रा रद्द नहीं की गई है, बल्कि अस्थायी रूप से स्थगित की गई है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि महिलाओं और बच्चों को ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने एबीसी ब्रेकफास्ट कार्यक्रम में कहा कि सरकार ने इन परिवारों की वापसी में कोई भूमिका नहीं निभाई है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा,
“हम उन्हें वापस नहीं लाएंगे। सरकार के खिलाफ 2023 में एक गैर-सरकारी संगठन ने अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन वह सफल नहीं हुई। जो लोग इस्लामिक स्टेट का समर्थन करने के लिए विदेश गए, उन्हें अपने फैसलों के परिणाम भुगतने होंगे।”
प्रधानमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब मानवाधिकार संगठनों का एक वर्ग महिलाओं और बच्चों की वापसी की मांग कर रहा है। उनका तर्क है कि बच्चों को उनके माता-पिता के निर्णयों की सजा नहीं मिलनी चाहिए।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया पहले भी कुछ आईएसआईएस से जुड़े परिवारों को वापस ला चुका है, लेकिन इस बार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी भी प्रयास में शामिल नहीं होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक भावना को ध्यान में रखते हुए सरकार सख्त रुख बनाए रखना चाहती है। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार के निर्णय का समर्थन किया है।
फिलहाल ये परिवार फिर से अल-रोज कैंप में हैं और उनके प्रतिनिधि सीरियाई अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि उन्हें अपनी वापसी के लिए स्वयं ही प्रयास करने होंगे।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर विदेशी संघर्ष क्षेत्रों में गए नागरिकों की वापसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन के सवाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।