ट्रंप का बयान: नोबेल न मिला तो अमेरिका का ‘अपमान’

ट्रंप का बयान: नोबेल न मिला तो अमेरिका का ‘अपमान’

वॉशिंगटन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि यदि उन्हें यह सम्मान नहीं दिया गया तो यह केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका का अपमान होगा।


युद्ध खत्म करने का दावा

ट्रंप ने मंगलवार को वर्जीनिया के क्वांटिको में शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बैठक के दौरान कहा कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय युद्धों और संघर्षों को कूटनीति और व्यापारिक समझौतों के ज़रिए थाम लिया है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को “ट्रेड डिप्लोमैसी” से हल करने का श्रेय खुद को दिया।

ट्रंप ने दावा किया, “भारत और पाकिस्तान के बारे में सोचिए। वहां युद्ध जैसी स्थिति थी। मैंने इसे व्यापार के जरिए रोका। दोनों देश व्यापार करना चाहते थे और यह शांति का रास्ता बना।”


सात युद्ध रोकने का श्रेय

ट्रंप ने खुद को “सात युद्धों को खत्म करने वाला नेता” बताया। उनके मुताबिक, उन्होंने भारत-पाकिस्तान, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, कोसोवो-सर्बिया, इजरायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया और रवांडा-कांगो जैसे देशों के बीच टकराव को रोकने में अहम भूमिका निभाई है।

हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने कहा कि अगर यह संघर्ष भी थम गया तो ही उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न दिए जाने का कोई आधार बच पाएगा।


भारत का रुख अलग

ट्रंप भले ही बार-बार भारत-पाक संघर्ष खत्म कराने का श्रेय खुद को दे रहे हों, लेकिन भारत ने हर बार ऐसे दावों को खारिज किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ तनाव को कम करने का फैसला दोनों देशों का द्विपक्षीय मामला था और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की भूमिका नहीं थी।


सवालों के घेरे में ट्रंप का बयान

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के ये दावे चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि वे लगातार खुद को “शांति स्थापित करने वाला” नेता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन नोबेल समिति किसे सम्मान देगी, इसका फैसला उनके दावों पर नहीं बल्कि वास्तविक योगदान और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।