वॉशिंगटन। अमेरिका एक बार फिर से सरकारी शटडाउन के मुहाने पर खड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट सांसदों के बीच टकराव इतना गहरा हो चुका है कि फंडिंग बिल पास होने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। यदि 1 अक्तूबर से पहले समझौता नहीं हुआ तो आधी रात से अमेरिकी सरकार की बड़ी-बड़ी सेवाएं ठप हो जाएंगी।
अमेरिकी सरकार को अपने विभागों को चलाने के लिए हर साल कांग्रेस से फंडिंग बिल पास कराना होता है। लेकिन राजनीतिक गतिरोध के कारण समय पर बिल पास नहीं हो पाता तो सरकार के पास खर्च करने की कानूनी शक्ति खत्म हो जाती है। ऐसे में गैर-जरूरी सेवाओं को बंद करना पड़ता है, जिसे शटडाउन कहा जाता है। यह अस्थायी होता है, मगर इस बार हालात अलग हैं। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि वे इस मौके का इस्तेमाल कई विभागों में स्थायी कटौती और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी के लिए कर सकते हैं।
अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब 8 लाख संघीय कर्मचारी बिना वेतन के टेंपरेरी छुट्टी पर भेजे जा सकते हैं। स्वास्थ्य व मानव सेवा विभाग अकेले 41% स्टाफ को छुट्टी देने की तैयारी में है।
नेशनल पार्क, म्यूजियम और सरकारी वेबसाइटें बंद हो सकती हैं।
फूड सहायता कार्यक्रम, स्कूल फंडिंग, छात्रवृत्ति व लोन जैसी योजनाओं पर असर पड़ेगा।
हवाई सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है, कई उड़ानें लेट हो सकती हैं।
हालांकि कानून व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, मेडिकल और हवाई सुरक्षा जैसी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकाल शुरू होते ही DOGE (Department of Government Efficiency) नाम का नया विभाग बनाया था और इसे चलाने की जिम्मेदारी एलन मस्क को सौंपी थी। लक्ष्य था सरकारी खर्च कम करना और नौकरियों में कटौती। हालांकि मतभेदों के चलते मस्क बाद में अलग हो गए, लेकिन तब तक करीब 3 लाख कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी थी। अब शटडाउन की आड़ में ट्रंप और व्यापक स्तर पर छंटनी करने की योजना बना रहे हैं।
शटडाउन रोकने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। डेमोक्रेट्स खर्च सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, जबकि ट्रंप अड़े हुए हैं। राष्ट्रपति ने दो टूक कह दिया है – “अगर शटडाउन होना है तो हो जाए।”
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह शटडाउन लंबा खिंचता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा। 2018 में ट्रंप के पिछले कार्यकाल में शटडाउन 34 दिन तक चला था, लेकिन इस बार हालात कहीं ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं।