NSW में 2026 से स्थानीय परिषद बैठकों में ऐतिहासिक बदलाव, जनता की भागीदारी और पारदर्शिता पर नई व्यवस्था

NSW में 2026 से स्थानीय परिषद बैठकों में ऐतिहासिक बदलाव, जनता की भागीदारी और पारदर्शिता पर नई व्यवस्था

सिडनी।
न्यू साउथ वेल्स (NSW) में स्थानीय शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्थानीय परिषद बैठकों (Local Council Meetings) से जुड़े नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा की है। ये परिवर्तन 1 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में लागू होंगे और सभी स्थानीय परिषदों के लिए अनिवार्य होंगे।

राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए नए ‘मॉडल कोड ऑफ मीटिंग प्रैक्टिस’ के तहत परिषद बैठकों के संचालन, जनता की भागीदारी, गोपनीय चर्चाओं और अनुशासन संबंधी नियमों को स्पष्ट और सख्त बनाया गया है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से स्थानीय लोकतंत्र मजबूत होगा और परिषदों के निर्णयों पर जनता का भरोसा बढ़ेगा।


🔍 बैठकों का लाइव प्रसारण अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार अब सभी स्थानीय परिषदों को अपनी बैठकों का लाइव प्रसारण (Live Streaming) करना अनिवार्य होगा। इससे आम नागरिक घर बैठे परिषद की कार्यवाही देख सकेंगे।
इसके साथ ही, बैठकों की रिकॉर्डिंग को कम से कम 12 महीनों तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना होगा, ताकि बाद में भी फैसलों की समीक्षा की जा सके।

सरकार का मानना है कि यह कदम निर्णय-प्रक्रिया को जनता के सामने लाकर पारदर्शिता की संस्कृति को बढ़ावा देगा।


🗣️ जनता की भागीदारी के तरीके में बदलाव

अब तक परिषद बैठकों के दौरान नागरिकों को सीधे बोलने की अनुमति मिलती थी, लेकिन 2026 से इसमें बदलाव होगा।
नए प्रावधानों के तहत जनता को अपने विचार अलग सार्वजनिक फ़ोरम (Public Forum) में रखने होंगे, जो मुख्य परिषद बैठक से पहले आयोजित किए जाएंगे।

सरकार का तर्क है कि इससे बैठकों में व्यवधान कम होगा और निर्णय-प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी। हालांकि, कुछ समुदायों का कहना है कि इससे जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद कमजोर हो सकता है।


⚖️ मेयर को अनुशासन बनाए रखने की अधिक शक्ति

परिषद बैठकों में बढ़ती अव्यवस्था और हंगामे को रोकने के लिए नए कोड में मेयर को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं।
अब यदि कोई पार्षद या नागरिक बैठक में अनुशासनहीन व्यवहार करता है, तो मेयर उसे बैठक से बाहर कर सकते हैं।

सरकार के अनुसार, यह नियम बैठकों को सम्मानजनक और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है।


🔒 गोपनीय बैठकों पर सख्ती

नए नियमों के तहत परिषदें अब गुप्त या निजी ब्रीफिंग्स में महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर चर्चा नहीं कर सकेंगी।
केवल कानूनी, भूमि सौदे या संवेदनशील मामलों में ही बंद कमरे में चर्चा की अनुमति होगी।

इतना ही नहीं, जैसे ही गोपनीयता की आवश्यकता समाप्त होगी, उन विषयों की जानकारी जनता के सामने लाना अनिवार्य होगा।


🏗️ फैसलों का लिखित कारण देना होगा

यदि कोई परिषद कर्मचारियों या विशेषज्ञों की सिफारिशों के विपरीत कोई निर्णय लेती है—खासकर निर्माण या विकास योजनाओं से जुड़े मामलों में—तो उसे अपने फैसले का लिखित और स्पष्ट कारण सार्वजनिक करना होगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फैसले व्यक्तिगत प्रभाव या राजनीतिक दबाव के बजाय तर्क और जनहित पर आधारित हों।


🏛️ सरकार का पक्ष

राज्य सरकार का कहना है कि स्थानीय परिषदें लोकतंत्र की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
सरकार के अनुसार, “जब निर्णय खुले मंच पर, जनता की निगरानी में लिए जाएंगे, तभी स्थानीय शासन पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा।”


⚠️ विवाद और चिंताएँ

इन बदलावों को लेकर कुछ परिषदों और नागरिक समूहों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि

  • बैठकों में जनता को सीधे बोलने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर सकता है।

  • मेयर को दिए गए अतिरिक्त अधिकारों का गलत इस्तेमाल भी संभव है।

सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि नियमों का उद्देश्य अभिव्यक्ति को दबाना नहीं, बल्कि व्यवस्था बनाए रखना है।


📌 आगे की तैयारी

सभी स्थानीय परिषदों को यह नया कोड 31 दिसंबर 2025 तक अपनाना होगा, ताकि 2026 से नए नियम पूरी तरह लागू किए जा सकें। इसके लिए परिषदों को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर तैयारियाँ शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।