“न्याय का मंदिर है, 7-स्टार होटल नहीं” — मुंबई हाईकोर्ट की नई इमारत पर बोले CJI गवई

“न्याय का मंदिर है, 7-स्टार होटल नहीं” — मुंबई हाईकोर्ट की नई इमारत पर बोले CJI गवई

मुंबई, 5 नवंबर 2025 — भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकली गवई ने बुधवार को मुंबई के बांद्रा-ईस्ट में प्रस्तावित बॉम्बे हाईकोर्ट की नई इमारत की नींव रखते हुए कहा कि न्यायपालिका को भव्यता नहीं, सेवा की भावना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा —

“यह भवन न्याय का मंदिर होना चाहिए, सात सितारा होटल नहीं।”


न्यायिक भवनों में सादगी और संवेदनशीलता पर जोर

CJI गवई ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायपालिका जनता की सेवा के लिए है, न कि दिखावे के लिए। उन्होंने कहा कि अब वो समय बीत चुका जब न्यायाधीश ‘फ्यूडल लॉर्ड’ समझे जाते थे।

“हम न्यायाधीश हैं, शासक नहीं। हमारा हर कदम नागरिकों की सुविधा और संवैधानिक कर्तव्यों के अनुरूप होना चाहिए,”
उन्होंने कहा।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि नई इमारत को अत्याधुनिक और टिकाऊ तो बनाया जाए, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी है।

“हम नहीं चाहते कि यह इमारत सात सितारा होटल जैसी दिखे — यह एक मंदिर है, जहाँ न्याय की पूजा होती है,”
गवई ने कहा।


3,750 करोड़ से बढ़कर 4,000 करोड़ तक पहुँची लागत

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस नए परिसर की लागत शुरू में लगभग ₹3,750 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन संशोधित प्रस्ताव के बाद यह बढ़कर करीब ₹4,000 करोड़ तक पहुँच गई है। यह परिसर 30 एकड़ भूमि पर बनेगा और इसमें लगभग 50 से 60 लाख वर्गफुट का निर्माण क्षेत्र होगा।

नई इमारत में एआई-सक्षम कोर्टरूम, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, वकीलों व पक्षकारों के लिए आधुनिक वेटिंग ज़ोन, और पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन जैसी सुविधाएँ होंगी।


पुराना भवन ऐतिहासिक, पर सीमित क्षमता

वर्तमान बॉम्बे हाईकोर्ट भवन, जो दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित है, वर्ष 1878 में बना था। बढ़ते मामलों और न्यायाधीशों की संख्या के चलते मौजूदा भवन अब अपर्याप्त हो गया है।
नई इमारत बांद्रा-ईस्ट में मेट्रो, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और सरकारी कॉलोनी के पास बनाई जा रही है, ताकि न्यायिक कामकाज और जनता दोनों के लिए पहुँच आसान हो सके।


सरकार का सहयोग और समयसीमा

महाराष्ट्र सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता सूची में रखा है। लगभग 15 एकड़ भूमि पहले ही हस्तांतरित की जा चुकी है, जबकि बाकी जमीन मार्च 2026 तक सौंपी जाएगी।
निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग पाँच वर्ष लगने की उम्मीद है।

राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस परियोजना को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा करेगी।


न्यायपालिका की जनता से निकटता पर बल

अपने भाषण के अंत में CJI गवई ने कहा कि न्यायपालिका का असली उद्देश्य नागरिकों को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय देना है।

“हमारी अदालतें भव्य भवनों से नहीं, बल्कि अपने न्याय से महान बनती हैं,”
उन्होंने कहा।