दोहा/यरूशलेम।
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस्राइल ने क़तर की राजधानी दोहा में हमास के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाते हुए हवाई हमला किया। इस हमले में कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें हमास नेता खलील अल-हैय्या के बेटे हिम्माम अल-हैय्या और उनके दफ्तर के निदेशक जिहाद लब्बाद शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, वरिष्ठ नेतृत्व के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हमले के बाद अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस ने इसे “लापरवाही” बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई “न तो इस्राइल और न ही अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाती है।” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि वह “हमले की जगह को लेकर बहुत चिंतित” हैं और इस्राइल से दोबारा क़तर पर हमला न करने की अपील की।
क़तर में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना मौजूद है, जिस वजह से यह हमला वॉशिंगटन के लिए और भी संवेदनशील हो गया है।
दोहा प्रशासन ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे “गैर-जिम्मेदाराना इस्राइली हरकत” बताया। क़तर का कहना है कि उसे हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।
हालांकि, इस्राइल ने दावा किया है कि उसने यह कार्रवाई अकेले की और पहले अमेरिका को इसकी सूचना दी थी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला पहले से ही अस्थिर मध्य पूर्व को और ज्यादा भड़काएगा। क़तर लंबे समय से हमास नेताओं की मेज़बानी करता रहा है और वहां उनके वार्ताकार सक्रिय रहते हैं। अब इस घटना से इस्राइल और क़तर के रिश्तों में खटास गहराने की आशंका है, जबकि अमेरिका की रणनीतिक स्थिति भी मुश्किल में पड़ सकती है।