ऐसा इतिहास गढ़ा गया मानो आज़ादी की लड़ाई सिर्फ एक दल ने लड़ी: राजनाथ सिंह

ऐसा इतिहास गढ़ा गया मानो आज़ादी की लड़ाई सिर्फ एक दल ने लड़ी: राजनाथ सिंह

लखनऊ, 17 नवंबर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को इतिहास लेखन में दलित, पिछड़े और आदिवासी नायकों की उपेक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। वीरांगना ऊदा देवी पासी की प्रतिमा के अनावरण समारोह में उन्होंने कहा कि वर्षों तक इतिहास को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो स्वतंत्रता संग्राम केवल एक ही राजनीतिक दल के प्रयासों से लड़ा गया हो।

“महत्वपूर्ण योगदानों को जानबूझकर दरकिनार किया गया”

राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा से प्रभावित कई इतिहासकारों ने अपने सुविधाजनक दृष्टिकोण के अनुसार इतिहास को आकार दिया। उनके अनुसार, दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज के वीर योद्धाओं को वह सम्मान कभी नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे।

उन्होंने कहा, “मुग़लों के इतिहास का बखान बढ़ा-चढ़ाकर किया गया, लेकिन पासी समाज, दलित समुदाय और देश के वंचित तबकों से आने वाले असंख्य वीरों को पाठ्यपुस्तकों में पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया। उनके बलिदान को पहचानने की कोशिश भी नहीं हुई।”

सरकार गुमनाम नायकों को सामने ला रही है

रक्षा मंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार अब ऐसे अनदेखे नायकों के योगदान को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक ऐसे योद्धा थे जिनकी बहादुरी के बिना देश का इतिहास अधूरा रह जाता, लेकिन उन्हें उचित पहचान न मिल पाने के कारण वे धीरे-धीरे लोकस्मृति से ओझल हो गए।

उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि देश के हर उस वीर का सम्मान करें जिसने राष्ट्र की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए संघर्ष किया—चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति या समुदाय से हो।”

“मोदी सरकार ने वंचित समाज को दिया उचित प्रतिनिधित्व”

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सदैव समाज के हाशिये पर रहने वाले तबकों को आवाज देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी सामाजिक विविधता और संतुलन सुनिश्चित किया गया है, ताकि सभी समुदायों को राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में समान प्रतिनिधित्व मिले।