लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यदि किसानों के हितों की आवाज उठाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है या संसद में विशेषाधिकार प्रस्ताव (प्रिविलेज मोशन) लाया जाता है, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगे।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ऐसा व्यापार समझौता करने जा रही है, जिससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ किसान हैं, लेकिन सरकार उनके हितों की अनदेखी कर रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत कृषि क्षेत्र में बाजार खोलने की तैयारी की जा रही है। उनका दावा है कि इससे कपास, सोयाबीन, सेब और अन्य फलों के उत्पादक किसानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी के अनुसार, अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी और आधुनिक तकनीक का लाभ मिलता है, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है।
उन्होंने कहा, “अगर सरकार विदेशी दबाव में भारतीय कृषि बाजार खोलती है तो इसका सीधा असर करोड़ों किसानों की आजीविका पर पड़ेगा। हम इसे किसान-विरोधी कदम मानते हैं।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों और विदेशी हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है, जबकि विदेशी कंपनियों के लिए रास्ते खोले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संसद के भीतर और बाहर वह किसानों के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे। “चाहे एफआईआर दर्ज हो, चाहे विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाए — मैं किसानों के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटूंगा,” उन्होंने अपने संदेश में दोहराया।
राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है और कहा है कि सरकार किसी भी समझौते में राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी।
आगामी संसद सत्र में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। कृषि संगठनों और विपक्षी दलों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।