पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 जून को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह बिहार में उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के अंत का संकेत माना जा रहा है और राज्य की राजनीति एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है।
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, जो अपने आप में एक अनोखा राजनीतिक रिकॉर्ड है। हालांकि उनका पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल वर्ष 2000 में केवल सात दिन का ही रहा था, लेकिन इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में लगातार प्रभाव बनाए रखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बढ़ सकती है। उनके इस कदम को सक्रिय राज्य राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई बार गठबंधन बदले और अलग-अलग दलों के साथ सरकार बनाई। कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ तो कभी महागठबंधन के साथ रहते हुए उन्होंने सत्ता संभाली। यही कारण है कि उन्हें बिहार की राजनीति का सबसे अनुभवी और रणनीतिक नेता माना जाता है।
साल 2005 से शुरू हुए उनके लंबे शासनकाल के दौरान बिहार में सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की गईं। हालांकि उनके शासन को लेकर विपक्ष समय-समय पर कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर सवाल भी उठाता रहा है।
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते हैं तो यह उनके सक्रिय मुख्यमंत्री कार्यकाल के समापन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि बिहार की राजनीति में अगला नेतृत्व किसके हाथ में जाता है और राज्य की सत्ता का संतुलन किस दिशा में बदलता है।