सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया डे की छुट्टी को लेकर देश में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में आम ऑस्ट्रेलियाई नागरिक उन कंपनियों के फैसले से नाराज़ हैं, जो कर्मचारियों को ऑस्ट्रेलिया डे की छुट्टी किसी अन्य तारीख़ पर लेने की अनुमति दे रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय दिवस को तय तारीख़ पर ही मनाया जाना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि कुछ कॉरपोरेट संस्थान “अति-प्रगतिशील (वोक)” विचारधारा के दबाव में परंपराओं से समझौता कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर सैकड़ों प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने इसे राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बताया, जबकि कुछ ने नारा दिया— “एक झंडा, एक दिन”, यानी देश का राष्ट्रीय दिवस सभी के लिए एक ही दिन होना चाहिए।
हालांकि, दूसरी ओर युवा ऑस्ट्रेलियाइयों और सामाजिक संगठनों का एक वर्ग इस फैसले का समर्थन करता नजर आया। उनका कहना है कि 26 जनवरी का दिन कुछ समुदायों, विशेषकर आदिवासी ऑस्ट्रेलियाइयों के लिए संवेदनशील है, इसलिए छुट्टी को लचीला बनाना एक समावेशी कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया डे को लेकर यह बहस आने वाले वर्षों में और गहरी हो सकती है, क्योंकि समाज में परंपरा और आधुनिक सोच के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।
सरकार की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई नई नीति घोषित नहीं की गई है, लेकिन सार्वजनिक दबाव को देखते हुए आने वाले समय में इस पर चर्चा संभव है।