सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मालिकों के सामने चार्जिंग की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। खासतौर पर इनर-सिटी इलाकों में रहने वाले लोग, जिनके घरों में निजी पार्किंग या गैरेज की सुविधा नहीं है, वे अपनी गाड़ियों को चार्ज करने के लिए खतरनाक ‘जुगाड़’ तरीकों का सहारा ले रहे हैं।
कई स्थानों पर देखा गया है कि ईवी मालिक अपने घरों से एक्सटेंशन केबल निकालकर उन्हें पेड़ों, बरामदों और यहां तक कि ड्रेनेज पाइपों से लटका रहे हैं ताकि सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों तक बिजली पहुंचाई जा सके। विशेषज्ञों ने इन तरीकों को “बेहद असुरक्षित” बताया है।
सिडनी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता अभी भी सीमित है। अपार्टमेंट या टेरेस हाउस में रहने वाले लोगों के पास निजी चार्जिंग पॉइंट लगाने की सुविधा नहीं होती। ऐसे में वे अपने घर के पावर सॉकेट से लंबी केबल खींचकर सड़क तक ले जाते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। “हम पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प चुन रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचा अभी तैयार नहीं है,” एक ईवी मालिक ने कहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक खुले में लटकती या जमीन पर पड़ी केबलें कई तरह के खतरे पैदा करती हैं—
पैदल चलने वालों के ठोकर खाने का जोखिम
बारिश के दौरान करंट लगने का खतरा
बच्चों और पालतू जानवरों के लिए जोखिम
कुछ मामलों में पड़ोसियों ने भी शिकायत की है कि ये अस्थायी व्यवस्था सार्वजनिक रास्तों पर बाधा बन रही है।
समस्या को देखते हुए सिडनी की कुछ स्थानीय काउंसिलों ने वैकल्पिक समाधान के लिए ट्रायल शुरू किए हैं। इनमें शामिल हैं:
हवा में केबल सस्पेंड करने की व्यवस्था, ताकि वे पैदल रास्ते से ऊपर रहें।
सड़क के नीचे या विशेष कवर के जरिए केबल बिछाने के प्रयोग, जिससे लोगों को ठोकर न लगे।
काउंसिल का कहना है कि यदि ये ट्रायल सफल रहते हैं, तो भविष्य में स्थायी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वैसे-वैसे शहरी बुनियादी ढांचे को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है।
जब तक सार्वजनिक और रिहायशी चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार नहीं होता, तब तक ऐसे ‘जुगाड़’ उपाय जारी रहने की आशंका है।
सिडनी का यह मामला साफ दिखाता है कि हरित परिवहन की दिशा में कदम तो बढ़ रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएं अभी भी पीछे हैं।