'गुमनामी स्वीकार नहीं': गैंगरेप पीड़िता ने नाबालिग आरोपियों की पहचान उजागर करने की मांग की

'गुमनामी स्वीकार नहीं': गैंगरेप पीड़िता ने नाबालिग आरोपियों की पहचान उजागर करने की मांग की

सिडनी – साल 2002 में गैंगरेप की पीड़िता रही टेगन वागनर ने हाल ही में सिडनी के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में हुए एक सामूहिक बलात्कार की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मांग की है कि इस हमले के आरोपियों की उम्र चाहे जो भी हो, उनकी पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए।

टेगन वागनर, जो स्वयं एक अत्यंत भयावह अनुभव से गुज़र चुकी हैं, ने कहा कि अपराध की गंभीरता के मद्देनज़र आरोपियों को कानून की आड़ में छिपने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि गुमनामी का संरक्षण अपराधियों को जवाबदेही से बचने का रास्ता देता है, जो समाज के लिए खतरनाक है।

"अगर कोई किसी महिला के साथ बलात्कार जैसा अमानवीय अपराध करता है, तो उसकी उम्र मायने नहीं रखती। लोगों को जानने का हक है कि हमारे समाज में ऐसे कौन लोग हैं," टेगन ने एक इंटरव्यू में कहा।

हालिया मामले में पीड़िता पर कई किशोर लड़कों द्वारा हमला किया गया, जिससे समाज में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। कानून के मुताबिक, 18 वर्ष से कम उम्र के आरोपियों की पहचान उजागर नहीं की जाती, लेकिन टेगन का कहना है कि जब अपराध इस हद तक जघन्य हो, तो कानून में बदलाव की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अपराधियों को कम उम्र के आधार पर सुरक्षा मिलती रही, तो यह पीड़िताओं के लिए न्याय नहीं, बल्कि अपमान होगा।

टेगन वागनर की यह अपील केवल न्याय की मांग नहीं है, बल्कि समाज में ऐसे अपराधों को लेकर चेतना और पारदर्शिता लाने की कोशिश भी है। इस बयान ने पीड़ितों के अधिकारों और कानून व्यवस्था की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।(SMH.com.au)